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Datiya By-election: बीजेपी से नरोत्तम मिश्रा लगभग फाइनल,कांग्रेस में 3 दावेदार

Narottam Mishra's Sneered On Kamalnath: नरोत्तम मिश्रा का कमलनाथ पर जोरदार तंज, कहा - सन्यास की उम्र में सेहरा बांध रहे हैं

Datiya By-election: बीजेपी से नरोत्तम मिश्रा लगभग फाइनल,कांग्रेस में 3 दावेदार

भोपाल: दतिया में उपचुनाव का ऐलान होते ही यहां से चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता सक्रिय हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में कई दावेदार उभर कर सामने आ सकते हैं। हालांकि भाजपा में यहां से पूर्व मंत्री एवं पार्टी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। वर्ष 2008 से इस सीट से नरोत्तम मिश्रा ही चुनाव लड़ते आ रहे हैं। वे तीन चुनाव यहां से लगातार जीते थे। तीनों ही बार उन्होंने राजेंद्र भारती को हराया था। पिछला चुनाव वे राजेंद्र भारती से ही हारे थे। इस बार हार जीत का समीकरण दमोदर यादव प्रभावित कर सकते हैं।

इस बार यह तय है कि यदि भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाया तो उनका मुकाबला राजेंद्र भारती से नहीं होगा। कांग्रेस की ओर से तीन दावेदारों के नाम सामने आए हैं। इसमें दतिया के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह, अवधेश नायक और राजेंद्र भारती के पुत्र अनूज भारती का नाम दावेदारों में शुमार बताया जाता है। इसमें घनश्याम सिंह दो बार दतिया से विधायक रह चुके हैं, वर्ष 2003 में जब कांग्रेस की प्रदेश भर में सिर्फ 37 सीटें आई थी, तब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर यह सीट जीती थी। खासबात यह है कि इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के अवधेश नायक से हुआ था। अब नायक कांग्रेस में आ चुके हैं और वे भी टिकट के दावेदार हैं।

इधर राजेंद्र भारती के पुत्र अनूज भी दोवदार हैं। अनूज के जरिए कांग्रेस राजेंद्र भारती के प्रति सहानुभमि को भुनाने का प्रयास करेगी। वहीं सबकी नजर दमोदर यादव पर टीकी हुई है। यादव आजाद समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। वे भी पिछले कई महीनों से तैयारी कर रहे हैं।

*दोनों ही दलों की प्रतिष्ठा का सवाल* 

मध्य प्रदेश में जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक घटनाक्रम चल रहे हैं, उससे यह उपचुनाव दोनों के लिए ही प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है। सत्ताधारी दल हर हाल में यह सीट जीतना चाहेगा, वहीं कांग्रेस में जिस तरह से नेताओं के आपसी मनमुटाव और विवाद सामने आएं हैं, उससे उभरने के लिए इस उपचुनाव में उसकी जीत कार्यकर्ताओं का मनोबल को बढ़ाने वाली होगी। इसलिए कांग्रेस के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है।