
निराश्रित निधि के खर्च के नियमों में बदलाव,कलेक्टरों के बढ़े पावर
भोपाल: मध्यप्रदेश में अब मुख्यमंत्री विवाह योजना के प्रकरणों में प्रोत्साहन राशि स्वीकृत करने के लिए कलेक्टरों के पावर बढ़ा दिए है। अब वे इसके लिए निराश्रित निधि से दो लाख की सीमा से अधिक नराशि के प्रस्ताव भी निराश्रित निधि ई पेमेंट एवं प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से खर्च कर सकेंगे।
अभी तक सामाजिक न्याय विभाग ने जिला स्तर पर निराश्रित निधि से किये जाने वाले खर्चो के लिए ब्याज और मूलधन के उपयोग के लिए वार्षिक सीमा निर्धारित कर रखी है।
मध्यप्रदेश निराश्रित एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता के लिए बने नियमों के तहत निराश्रित निधि से एक बार में या एक माह के भीतर पच्चीस हजार रूपए और पूरे वित्तीय वर्ष में अधिकतम ढाई लाख रुपए तक की सीमा तक ब्याज की रकम के उपयोग करने की बाध्यता है। इसके लिए वार्षिक सीमा निर्धारित की गई है। कलेक्टर किसी एकल संस्था, अभिकरण के प्रबंधन या कार्य के प्रयोजन के लिए निराश्रित निधि की जमा पर अर्जित ब्याज की रकम से एक बार में दो लाख रुपए तक की सीमा तक निराश्रित निधि ई भुगतान प्रणाली के माध्यम से कर सकेगा। इस रकम से अधिक के खर्च के लिए प्रस्ताव आयुक्त संचालक सामाजिक न्याय की लिखित सहमति प्राप्त होंने के बाद ही मंजूरी किए जा सकते है।
अब सामाजिक न्याय विभाग ने इन नियमों में बदलाव कर जिला कलेक्टर को निराश्रित निधि की मूलधन, ब्याज की राशि से मुख्यमंत्री दिव्यांगजन विवाह योजना के प्रकरणों में प्रोत्साहन राशि स्वीकृत करने के पूर्ण वित्तीय अधिकार अर्थात वह दो लाख रुपए की सीमा से अधिक भी हो तो उनको भी इस योजना के लिए निराश्रित निधि ई पेमेंट एवं प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से खर्च करने के अधिकार दिए है। इसके अलावा मुख्यमंत्री दिव्यांग शिक्षा प्रोत्साहन योजना में निराश्रित निधि की ब्याज की राशि से भुगतान किए जा सकेंगे।
जिला स्तर पर कई मामलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र, वरिष्ठ आश्रम, दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं, सीएम दिव्यांगजन विवाह योजना तथा मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना में निराश्रित निधि से अनुदान, भुगतान लाभ संस्थाओं को समय पर नहीं किए जा रहे थे। जिले को अधिकार होंने के बाद भी कई महीनों तक भुगतान लंबित रखते हुए एक साथ ईपीओ तैयार कर संचालनालय को भेजे जा रहे थे जबकि जिलों में पर्याप्त आवंटित ब्याज राशि उपलब्ध रहती है।
अब जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के कर्मचारियों को मासिक मानदेय वेतन भुगतान और अन्य आकस्मिक व्यय संबंधी भुगतान, जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में कृत्रिम अंग के निर्माण के लिए कच्चे माल की खरीदी, अंगों की मरम्मत एवं फिटिंग के लिए सामग्री खरीदी के भुगतान, सीएम दिव्यांगजन विवाह और सीएम दिव्यांगजन शिक्ष्ज्ञा प्रोत्यान योजना के भुगतान, दिव्यांगजन वरिष्ठजन हेतु संचालित निराश्रित निधि से पूर्व से अनुदान एवं विभागीय मान्यता प्राप्त अशासकीय संस्थाओं वृद्धाश्रमों को मासिक अनुदान, निराश्रित और निर्धन व्यक्तियों की सहायता से जुड़े भुगतान जिलों को आवंटित निराश्रित निधि की ब्याज की राशि से जिला स्तर पर ही किए जाएंगे। दो लाख रुपए से अधिक राशि होंने पर जिला स्तर पर मद अनुसार अलग-अलग ईपीओ ब्याज राशि से बनाकर सक्षम स्वीकृति प्राप्त कर जिला स्तर पर ही दिए जाएंगे।ब्याज अंतर्गत कैप उपलब्ध न होंने पर मूलधन से भुगतान कर प्रस्ताव संचालनालय को भेजे जाए। भारत सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव समय पर भेजे जाए और वहां से अनुदान प्राप्त होने पर निराश्रित निधि से पूर्व में दिए गए अनुदान की समस्त राशि निराश्रित निधि बैंक खाते में अनिवार्य रुप से जमा कराई जाएगी।





