
अनुमति मिली देरी से इसलिए नए क्रिमिनल कानून लागू करने में हम फिसड्डी,28 राज्यों में 22वें स्थान पर एमपी
भोपाल: नए आपराधिक कानून लागू होने के दो साल बाद भी हमारा प्रदेश इसके प्रभावी क्रियान्वन में देश के अग्रणी राज्यों में जगह नहीं बना सका है। स्थिति यह है कि मध्य प्रदेश की रैंकिंग इसमें 22 वे पायदान पर है। यानि हम देश के 28 राज्यों में फिसड्डी हैं।
जुलाई 2024 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भातीरय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इनके क्रियान्वयन की समीक्षा की है। मध्य प्रदेश में भी इसकी समीक्षा हो चुकी है।
इस दौरान पाया गया कि कुछ जिलों में इस पर बेहतर काम हुआ है। इसमें हरियाणा राज्य पहली पायदान पर है, उसे सौ में से 94.5 नंबर मिले हैं, जबकि मध्य प्रदेश को 68.48 नंबर मिले हैं।
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों की माने तो प्रदेश में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का उपयोग तो हो रहा है, लेकिन केंद्र सरकार के विकसित डिजिटल प्लेटफार्म को अपनाने में देरी के कारण राज्य का प्रदर्शन प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार ने 25 जून को ही ई-साक्ष्य के उपयोग की अनुमति संबंधी अधिसूचना जारी की है। इसके चलते ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति और इंटर आॅपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) जैसे केंद्रीय प्लेटफार्म का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाया है। ई-साक्ष्य डिजिटल से साक्ष्य संग्रह और प्रबंधन किया जाता है, जबकि न्याय श्रुति वर्चुअल कोर्ट और दूरस्थ गवाही के लिए विकसित वीडियो कॉन्फे्रंसिंग प्लेटफार्म है। जबकि आईसीजेएस पुलिस,न्यायालय, जेल, अभियोजन और फॉरेसिंक संस्थाओं को एकीकृत करने वाला केंद्रीय आईटी प्लेटफार्म है। ऐसा माना जा रहा है कि इन्हें समय पर लागू नहीं किए जाने से प्रदेश के अंक कम हुए हैं।
इन जिलों ने किया बीएनएस में बेहतर काम
हालांकि इस बीच कुछ जिलों में बहुत अच्छा काम भी किया है। बीएनएस के तहत दर्ज मामलों में 60 दिवस के भीतर जांच पूरी करने वाले टॉप पांच जिले बड़वानी, झाबुआ, हरदा, पन्ना और उमरिया हैं। इस मामले में रीवा, मऊगंज, सीधी, मुरैना और छिंदवाड़ा कमजोर जिले रहे। खासबात यह है कि जिलों की रैंक में भोपाल शहर 46 वें स्थान पर रहा है। वहीं 90 दिनों में जांच पूरी करने वाले जिलों में भी बड़वानी, हरदा टॉप पर रहे। इसमें डिंडोरी, नर्मदापुरम और खरगोन ने भी बेहतर काम किया है। वहीं ई-साक्ष्य के उपयोग में बालाघाट, जीआरपी जबलपुर, झाबुआ, आगर मालवा और खरगोन ने अच्छा काम किया है।





