Fake milk factory in Gujarat: पांच साल से चल रहा था खतरनाक खेल

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Fake milk factory in Gujarat: पांच साल से चल रहा था खतरनाक खेल

Sabarkantha: गुजरात के साबरकांठा जिले में खाद्य सुरक्षा और कानून व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने एक ऐसी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है जो पिछले करीब पांच वर्षों से यूरिया, डिटर्जेंट और रासायनिक पदार्थों से नकली दूध और छाछ तैयार कर लोगों को पिला रही थी। इस खुलासे के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

● ‘श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स’ के नाम से चल रही थी मिलावट की फैक्ट्री

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह यूनिट ‘श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स’ नाम से संचालित हो रही थी। फैक्ट्री बाहर से सामान्य डेयरी यूनिट की तरह दिखाई देती थी, लेकिन अंदर नकली दूध तैयार करने का पूरा सेटअप मौजूद था। यह फैक्ट्री साबरकांठा जिले के साथ-साथ मेहसाणा जिले के ग्रामीण इलाकों में दूध और छाछ की नियमित आपूर्ति कर रही थी।

यूरिया और डिटर्जेंट से तैयार किया जा रहा था दूध

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दूध बनाने के लिए यूरिया खाद, डिटर्जेंट पाउडर, कॉस्टिक सोडा, रिफाइंड पामोलिन तेल, सोयाबीन तेल और मिल्क पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन रसायनों को पानी और सीमित मात्रा में असली दूध के साथ मिलाकर दूध जैसा दिखने वाला घोल तैयार किया जाता था, ताकि उसकी गाढ़ापन, झाग और रंग असली दूध जैसा लगे।

कम असली दूध से हजारों लीटर नकली उत्पाद

जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री में बेहद कम मात्रा में असली दूध का उपयोग किया जाता था और उसी के सहारे कई गुना अधिक मात्रा में नकली दूध और छाछ तैयार की जाती थी। यह मिलावटी उत्पाद रोजाना आसपास के गांवों में सप्लाई किया जाता रहा, जिसे सैकड़ों ग्रामीण वर्षों से अनजाने में पीते रहे।

71 लाख रुपये से अधिक का माल जब्त

LCB की टीम ने छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में मिलावटी दूध, छाछ, रासायनिक पदार्थ, मिल्क पाउडर और मशीनरी जब्त की। पुलिस के अनुसार जब्त किए गए माल की अनुमानित कीमत करीब 71 लाख रुपये है। मौके पर मौजूद भारी मात्रा में असुरक्षित दूध को नष्ट भी किया गया ताकि वह बाजार में न जा सके।

पांच आरोपी गिरफ्तार, मुख्य संचालक फरार

इस मामले में पुलिस ने फैक्ट्री से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं इस पूरे रैकेट का मुख्य आरोपी और फैक्ट्री मालिक राकेश उर्फ धामो पटेल फिलहाल फरार है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा, जांच का दायरा बढ़ा

विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया, डिटर्जेंट और कॉस्टिक सोडा जैसे रसायनों से बना दूध लंबे समय तक सेवन करने पर किडनी, लिवर, आंतों और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस और संबंधित विभाग अब यह भी जांच कर रहे हैं कि इस नकली दूध की सप्लाई किन-किन इलाकों तक हुई और इसमें कोई बड़ा नेटवर्क तो शामिल नहीं है।

● प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल विश्वसनीय और अधिकृत स्रोतों से ही दूध व डेयरी उत्पाद खरीदें और किसी भी संदिग्ध दूध या छाछ की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। यह मामला खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है।