
लोन वुल्फ आतंकी मॉड्यूल का फराज बड़े आतंकी के नाम की पहचान का कर रहा था इस्तेमाल
भोपाल: एटीएस द्वारा भोपाल से गिरफ्तार किए गए लोन वुल्फ आतंकी मॉड्यूल का मोहम्मद फराज बड़े आतंकी के नाम की पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। इसके चलते ही उसने अपने मॉड्यूल से कुछ लोगों को जोड़ने का काम किया था। एटीएस इसकी भी जांच कर रही है कि उसने क्यों उस आतंकी के नाम का इस्तेमाल अपनी पहचान के लिए किया था। इधर इस मॉड्यूल के गिरफ्तार सदस्यों से मिले कथित साहित्य की भी जांच जारी है। फराज को एटीएस ने भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से 12 जून को गिरफ्तार किया था।
सूत्रों की मानी जाए तो जांच में यह भी सामने आया है कि फराज कथित तौर पर खालिद सैफुल्लाह नाम की पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। खालिद सैफुल्लाह का नाम अतीत में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा जाता रहा है।
अधिकारियों के अनुसार वह 2025 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अज्ञात हमलावरों द्वारा मारा गया था।
*साहित्य और वीडियो की चल रही जांच*
जांच के दौरान एटीएस ने अरबी भाषा में लिखी गई कथित साहित्य सामग्री जब्त की है। इसके अलावा कई डिजिटल वीडियो भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ वीडियो में अफगानिस्तान और अन्य देशों में सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा की गई हिंसक घटनाओं को दिखाया गया है। एटीएस इन सामग्रियों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
दूसरे लोगों को भी जोड़ रहा था नेटवर्क में
एटीएस के अनुसार फराज अन्य लोगों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसी क्रम में उसने लगभग तीन वर्ष पहले अपने पुराने मदरसा मित्र नईम अब्दुल्ला कुरैशी को भी समूह से जोड़ा। नईम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के ननौता क्षेत्र का निवासी है। जांच में यह भी सामने आया है कि समूह के सदस्य नियमित रूप से आनलाइन बैठकों में हिस्सा लेते थे। इन बैठकों का समन्वय पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर और बिहार के मधुबनी निवासी इजहार-उल-हक द्वारा किया जाता था।





