
GAD ने समय पर राय नहीं दी, आदेश नहीं जारी किए, 47 अधिकारी पदोन्नति से हो गए वंचित
भोपाल : मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग से विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए होंने वाली डीपीसी के लिए समय पर निर्णय नहीं लिया और समय पर राय नहीं दी, आदेश जारी नहीं किए जिसके चलते 47 प्रकरणों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग कोई कार्यवाही नहीं कर पाया और इन मामलो से जुड़े अधिकारी कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। यही नहीं विभागीय जांच के प्रकरणों के निराकरण में भी मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने 32 से 267 दिन का समय लगाया जो आयोग की अपर्याप्त कार्यवाही को दर्शाता है।
इस लेटलतीफी को लेकर कैग ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और सामान्य प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए है। आयोग ने विभगीय पदोन्नति प्रकरणों के निराकरण के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की थी। आयोग ने उच्च न्यायालय द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2002 में पदोन्नति में आरक्षण सें संबंधित प्रावधान को अप्रैलस 2016 में निरस्त करने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग से पदोन्नति में आरक्षण पर मई 2016 में स्पष्टीकरण मांगा था। जिसे एसलपी में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया था जिसमें आदेश दिया गया था कि यथा स्थिति बनाए रखी जाए। हालाकि प्रतिक्रिया न मिलने के कारण आयोग इस प्रकरण पर राय लेने के लिए स्मरण पत्र भेजता रहा। चार स्मरण पत्र जारी होंने पर भी जबाब नहीं आया। आयोग ने पदोन्नति में आरक्षण पर स्पष्टीकरण मागने जीएडी को जनवरी में एक स्मरण पत्र भेजा।
जीएडी ने फरवरी 2019 में आयोग को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में पदोन्न्रति की प्रक्रिया में बाधा है। लेकिन बाद में मई 2016 में जीएडी ने आयोग को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से पहले आयोजित डीपीसी के प्रकरणों को तय करने में कोई बाधा नहीं थी। इस प्रकार जीएडी द्वारा समय पर राय, आदेश जारी न किए जाने के कारण हाईकोर्ट के अप्रैल 2016 के आदेश के पूर्व आयोजित डीपीसी के 47 मामलों में कोई कार्रवाई नही की गई। इसके चलते ये सभी अधिकारी कर्मचारी समय पर पदोन्नति पाने से वंचित रह गए। आयोग ने कैग की आपत्ति पर जवाब दिया कि जीएडी द्वारा समय पर स्पष्टीकरण जारी न करने के कारण विलंब हुआ। यदि जीएडी और आयोग ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय का समय पर समन्वय और उचित विश्लेषण किया जोता तो डीपीसी की समीक्षा पहले ही तय की जा सकती थी।
पदोन्नति के लिए योग्य भी पदोन्नति से वंचित-
इस मामले में व2015 से लेकर 2019 के बीच के 47 प्रकरणों में प्रकरण प्राप्त करने , विभाग को लौटाए जाने, प्रकरण आयोग को पुन: प्राप्त करने, पदोन्नति की अनुशंसा करने में विलंब हुआ और पदोन्नति के लिए योग्य पाए गए 47 अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति से वंचित हो गए।
विभागीय जांच के प्रकरणों में लेटलतीफी-
कैग ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की विभागीय जांच प्रकरणों में की गई कार्यवाही पर भी आपत्ति जताई है। आयोग के 373 प्रकरणों में से 42 की नमूना जांच में पाया गया है वर्ष्ज्ञ 2019 से 2022 के बीच निराकरण के लिए 32 से 267 दिन का समय लिया। एक प्रकरण तो जुलाई 2024 से अभी तक लंबित है। यह आयोग द्वारा विभागीय जांच प्रकरणों में अपर्याप्त कार्यवाही को दर्शाता है। आयोग ने इस पर जवाब दिया कि कमियों और प्रक्रियात्मक त्रुटि के कारण यह हुआ। अब देरी से बचने के लिए आयोग ने एक सप्ताह से दस दिन के भीतर ही विभागों को वापस भेजना शुरु कर दिया है।





