High Court Stays on Main Exam of MPPSC : एमपीपीएससी-2025 की मुख्य परीक्षा पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक, 15 अप्रैल को सुनवाई!

आयोग को 15 अप्रैल तक वर्गवार कटऑफ अंक जारी करने का निर्देश दिया गया!

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High Court Stays on Main Exam of MPPSC : एमपीपीएससी-2025 की मुख्य परीक्षा पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक, 15 अप्रैल को सुनवाई!

Jabalpur : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 पर अंतरिम रोक लगाकर राज्य लोक सेवा आयोग (MPPSC) को बड़ा झटका दिया। साथ ही अदालत ने आयोग को 15 अप्रैल के पहले हाईकोर्ट में डाटा दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। लोक सेवा आयोग द्वारा कुल 158 पदों की भर्ती के लिए 05/03/2025 को घोषित प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में वर्गवार कट ऑफ अंक जारी नहीं किया गया। जबकि, पूर्व की सभी परीक्षाओं में वर्गवार कट ऑफ अंक जारी किया जाता रहा है।

इसे लेकर याचिकर्ताओ का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के विभिन्न फैसलों को बायपास करते हुए आयोग अनारक्षित पदों में आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित नहीं किया। साथ ही सभी अनारक्षित पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित करके प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया। आरोप है कि आयोग ने अपनी इस असंवैधानिक त्रुटि को छुपाने के उद्देश्य से 2025 के प्रारंभिक परीक्षा में कट मार्क्स भी जारी नहीं किए गए। जबकि, नियमानुसार प्रत्येक चरण की परीक्षा में वर्गवार कटऑफ अंक जारी किए जाने का प्रावधान है।

याचिकाकर्ता भोपाल निवासी सुनीत यादव, नरसिंहपुर निवासी पंकज जाटव एवं बैतूल निवासी रोहित कावड़े जो ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थी हैं। जिनको मुख्य परीक्षा में चयन से वंचित कर दिया गया है। इन सभी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गईं।

 

इस तरह समझें पूरा मामला

मुख्य न्यायामूर्ति सुरेश कुमार केत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ द्वारा इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और आरजी वर्मा ने कोर्ट में दलीलें दीं। उन्होंने बताया कि पूर्व में दायर याचिका में न्यायालय द्वारा अंतरिम आदेश पारित कर हाईकोर्ट की अनुमति के बिना रिजल्ट जारी नहीं करने का अंतरिम आदेश पारित किया गया। जबकि, 05/3/25 को प्रारंभिक परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित किया जा चुका है।

न्यायालय क़ो सरकारी वकील और पीएससी के वकील ने याचिका की सुनवाई दिनांक 25/3/25 क़ो बताया था कि प्रारम्भिक परीक्षा दिनांक 16/02/25 क़ो आयोजित हो चुकी है और रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। जबकि रिजल्ट 05/03/2025 क़ो जारी हो चुका है। सुनवाई दिनांक को सरकारी वक़ील और पीएससी के वकील ने कोर्ट को गुमराह किया। इसलिए आदेश दिनांक 25/3/25 में संशोधन करने की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट क़ो यह भी बताया कि एक और नई याचिका कोर्ट के सामने सूचिबद्ध है जिसमें प्रारंभिक परीक्षा 2025 का रिजल्ट जो दिनांक 05/03/25 क़ो घोषित किया गया, उसकी संवैधानिकता क़ो चुनौती दी गई है। रिजल्ट में वर्गवार कटऑफ मार्क जारी नहीं हुए हैं और अनारक्षित पदों पर एक भी आरक्षित वर्ग का प्रतिभावान मुख्य परीक्षा के लिए सिलेक्ट नहीं किया गया। न उन अभ्यर्थियों को चयनित किया गया जिन्होंने छूट प्राप्त की है। साथ ही उन्हें मेरिट सूची से पृथक कर दिया गया है एवं मुख्य परीक्षा के लिए चयनित अभ्यर्थियों के अंक और केटेगरी डिसक्लोज भी नहीं की गई है। इससे स्पष्ट है कि आयोग द्वारा कम्युनल आरक्षण लागू कर सभी अनारक्षित पदों क़ो सामान्य वर्ग से आरक्षित करके रिवर्स रिजर्वेशन लागू कर दिया गया है। यह मौजूदा कानून एवं संवैधानिक प्रावधानो के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा? 

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के सभी तर्कों को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लेते हुए आगामी मुख्य परीक्षा पर रोक लगा दी और आयोग क़ो निर्देशित किया कि 15 अप्रैल के पहले वर्गवार कटऑफ अंक जारी करके कोर्ट को अवगत कराएं। अदालत ने कहा कि आरक्षित वर्ग के कितने प्रतिभावान अभ्यर्थियों को अनारक्षित में चयनित किया गया उन सभी का डाटा वर्गवार दाखिल करें।