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अंतर जातीय विवाह किया तो समाज से बहिष्कृत, 31 हजार का जुर्माना और बकरा देने की कर रहे मांग, पीड़ित परिवार ने ली मानव अधिकार आयोग की शरण

अंतर जातीय विवाह किया तो समाज से बहिष्कृत, 31 हजार का जुर्माना और बकरा देने की कर रहे मांग, पीड़ित परिवार ने ली मानव अधिकार आयोग की शरण

बालाघाट: कहने को तो हम डिजिटल युग में जी रहे हैं किंतु आज भी कुछ समाज के लोग रूढ़िवादी परंपराओं का बोझा अपने सिर ढोरहे हैं । जिसमें किसी को भी समाज से बहिष्कृत करने की रूढ़िवादी परंपरा शामिल है ।

वॉयसोवर मामला बालाघाट नगर से लगे ग्राम गर्रा का है यंहा निवास करने वाले एक परिवार ने समाज से बहिष्कृत करने की शिकायत मानव अधिकार आयोग मित्र और सामाजिक कार्यकर्ता फिरोजा खान से की है ।

पीड़ित श्रीराम मालाधारी ने बताया कि वे पाटन जबलपुर के उपजैल में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ है। श्रीराम के अनुसार उसने अपने पुत्र विशाल मालाधारी का विवाह ग्राम कोसमी निवासी एससी समाज की पूजा मेश्राम के साथ 15 फरवरी को संपन्न करवाया था । पीड़ित श्रीराम की माने तों जब वे विवाह के पूर्व शादी की पत्रिका बांट रहा था। तब गर्रा गांव के उनके समाज के लोग यह कहकर विरोध दर्ज कर रहे थे कि अपने समाज की लडक़ी न मांगते हुए बेटे के लिए मेश्राम परिवार की बहू मांग रहा है। इस तरह की बाते कहते हुए मीटिंग बुलाने और 31 हजार रुपए का जुर्माना देने की मांग की गई। इसके अलावा समाज में उन्हें वापस लेने के नाम पर भी समाज जनों को बकरा खिलाने की मांग रख दी । ऐसा न करने पर शादी में शामिल नहीं होने और समाज से बहिष्कृत करने की बात कही गई। यही नहीं लोग उनके घर हुए विवाह कार्यक्रम में शामिल भी नहीं हुए।

इस कारण पीड़ित परिवार का मानना है कि उनकी मान प्रतिष्ठा धूमिल हुई है जिससे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच करवाकर न्याय दिलाए जाने की मांग की है। वहीं मानव अधिकार आयोग मित्र फिरोजा खान ने बताया कि ऐसे मामले गैरकानूनी है । इसके लिए प्रिवेंशियन ऑफ सोशल डिस्पेरिटी एक्ट बना हुआ है जिसमें सजा का प्रावधान है ।