
चक्रव्यूह को तोड़ते रहो राहुल…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
नेहरू-गांधी परिवार में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर पहली बार राजीव गांधी ने पारी शुरू की थी।हालांकि, वह इससे पहले देश के प्रधानमंत्री रह चुके थे। उन्होंने 18 दिसंबर 1989 से 24 दिसंबर 1990 तक कुल एक साल छह दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में जिम्मेदारियों का निर्वहन किया था। राजीव गांधी के निधन के बाद इस परिवार में इस पद पर उनकी पत्नी सोनिया गांधी भी आसीन रहीं। सोनिया गांधी ने 13 अक्टूबर 1999 से 6 फरवरी 2004 तक 4 साल 116 दिन तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन किया था। और अब गांधी-नेहरू परिवार के तीसरे सदस्य और राजीव-सोनिया के पुत्र राहुल गांधी ने 26 जून 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी दो साल की पारी पूरी कर ली है। और उम्मीद यही है कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में वह मां सोनिया गांधी के कार्यकाल की पारी को पार करते हुए सबसे लंबे समय तक इस पद पर सुशोभित रहेंगे।
लोक सभा के विपक्ष के नेता लोकसभा के निर्वाचित सदस्य होते हैं जो भारत की संसद के निचले सदन में आधिकारिक विपक्ष का नेतृत्व करते हैं। विपक्ष के नेता लोकसभा में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के संसदीय अध्यक्ष होते हैं जो सरकार में नहीं होती। शर्त यह होती है कि उक्त राजनीतिक पार्टी के पास लोकसभा में कम से कम 10% सीटें हों। राहुल गांधी वर्तमान में लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत हैं। लोकसभा ने 1969 तक विपक्ष के नेता को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी थी। यह पद 1970 और 1977 के बीच, 1980 और 1989 के बीच और 2014 और 2024 के बीच खाली रहा। जून 2024 में कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी को भारत की संसद में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है, जिससे एक दशक से खाली पड़े पद को भरा गया है। राहुल गांधी 26 जून 2024 को नेता प्रतिपक्ष बने थे, जब कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 99 सीटें जीतकर यह पद हासिल किया। 25 जून 2024 को इंडिया गठबंधन की मीटिंग में राहुल गांधी के बतौर विपक्ष का नेता बनने पर औपचारिक मुहर लगी थी। नेता प्रतिपक्ष का कद कैबिनेट रैंक का होता है। नेता विपक्ष सीबीआई निदेशक सहित कई अहम पदों के लिए बनी सिलेक्ट कमिटी का मेंबर होता है। वहीं वह संसद की प्रतिष्ठित पीएसी लोकलेखा समिति का अध्यक्ष होता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर दो साल पूरे होने पर राहुल गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य हर भारतीय की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना है।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लोगों से कहा कि उनका मकसद हर भारतीय की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नीट अभ्यर्थियों, संविधान की रक्षा और चुनावी पारदर्शिता (वोट चोरी का पर्दाफाश) जैसे मुद्दों पर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने पिछले दो साल के अपने सफर को याद करते हुए लिखा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर बिताया गया हर दिन आम लोगों की आवाज संसद और सरकार तक पहुंचाने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, ‘आज मुझे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने दो साल हो गए हैं। इन दो वर्षों का हर दिन एक ही काम के लिए समर्पित रहा है और वह काम रहा है हर भारतीय की आवाज को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाना। सड़कों से लेकर संसद तक जनता का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। सफर लंबा है, लेकिन मेरा संकल्प वही है। मैं आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूंगा।
दो साल पूरे होने पर राहुल गांधी द्वारा जारी एक 3 मिनट 29 सेकंड के वीडियो में संसद के 42 भाषणों की बात होने के साथ ही अलग-अलग वर्ग के लोगों से मुलाकात को दिखाया गया है। लोकसभा में मणिपुर का जिक्र, अग्निवीरों का मुद्दा, पेपर लीक, ट्रंप के बयान पर सवाल करते हुए पीएम मोदी पर निशाना आदि भाषणों की क्लिप इस वीडियो में शामिल है। इस वीडियो में राहुल गांधी कहते हैं कि आप चक्रव्यूह बना देते हो हम चक्रव्यूह तोड़ने का काम करते हैं।
तो निश्चित तौर पर राहुल गांधी को सत्तापक्ष भले ही नेता प्रतिपक्ष की तरह गंभीरता से न लेने का दिखावा करता हो, लेकिन भारत के मतदाताओं के बीच राहुल गांधी हमेशा प्रासंगिक रहते हैं। उनकी उपस्थिति कांग्रेस को सत्ता तक ले जाती, भले ही न दिखती हो, लेकिन सत्तापक्ष को सीधी चुनौती देने की हिम्मत दिखाने में राहुल कोई चूक नहीं करते। बात वही है कि राहुल चक्रव्यूह तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन चक्रव्यूहों का सिलसिला खत्म होने का नाम भी नहीं ले रहा है। यही कहा जा सकता है कि चक्रव्यूह को तोड़ते रहो राहुल… कभी न कभी तो चक्रव्यूह से बाहर आकर सत्ता की कुर्सी नजर आएगी ही…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।




