Ken-Betwa Link Project: जल, जमीन और जीवन की लड़ाई तेज, केन नदी में ‘जल सत्याग्रह’, गांवों में ‘चूल्हा बंद’; सांकेतिक फांसी आंदोलन की चेतावनी!

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Ken-Betwa Link Project: जल, जमीन और जीवन की लड़ाई तेज, केन नदी में ‘जल सत्याग्रह’, गांवों में ‘चूल्हा बंद’;
सांकेतिक फांसी आंदोलन की चेतावनी!

छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी और किसान अब निर्णायक चरण में पहुंच गए हैं। मंगलवार को जिले में कई मोर्चों पर एक साथ प्रदर्शन हुए, जिनमें ‘जल सत्याग्रह’, ‘मिट्टी सत्याग्रह’ और ‘चिता आंदोलन’ शामिल रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीण केन नदी में उतरकर घंटों पानी में खड़े रहे और अपने विस्थापन के खिलाफ विरोध जताया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस केन नदी के पानी के नाम पर यह परियोजना बनाई जा रही है, वही अब उनके उजड़ने का कारण बन रही है। आंदोलनकारियों ने इसे “जीवन और अस्तित्व की अंतिम लड़ाई” बताया है।

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मिट्टी की कसम, चिता पर डटे ग्रामीण..

मंगलवार को ‘मिट्टी सत्याग्रह’ का दूसरा दिन रहा। ग्रामीणों ने अपने खेतों की मिट्टी हाथ में लेकर संकल्प लिया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। वहीं ‘चिता आंदोलन’ दसवें दिन भी जारी रहा, जहां प्रतीकात्मक चिताओं के पास बैठकर लोग विस्थापन के दर्द को जाहिर कर रहे हैं।

इसके साथ ही कई गांवों में ‘चूल्हा बंद’ रखा गया। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भूखे रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, जिससे गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

प्रशासन पर गंभीर आरोप..

प्रभावितों ने प्रशासन पर फर्जी ग्राम सभाएं कराने, अधूरा मुआवजा देने और दबाव बनाकर बेदखली की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि रुंज, मझगांय और नेगुवा बांध से जुड़ी ग्राम सभाएं कागजों में ही पूरी कर ली गईं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांवों में बिचौलिये सक्रिय हैं, जो मुआवजे की राशि में अवैध कटौती कर रहे हैं। पहचान पत्रों के नाम पर गरीबों से पैसे वसूले जा रहे हैं।

वार्ता विफल, आंदोलन तेज..

जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर के अनुसार प्रशासन के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जमीनी सच्चाई से दूर रहकर केवल कागजी कार्रवाई कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश स्वीकार नहीं करेंगे।”

सांकेतिक फांसी का ऐलान..

आंदोलनकारियों ने बुधवार को ‘सांकेतिक फांसी आंदोलन’ की घोषणा की है। उनका कहना है कि जमीन और आजीविका छिनने के बाद जीवन का कोई अर्थ नहीं बचता। यह प्रदर्शन प्रशासन को चेतावनी देने के लिए किया जाएगा।

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फिलहाल हजारों ग्रामीण प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं। ‘भूख-पड़ताल’ जारी है और आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है, “हम पानी में खड़े हैं, भूखे हैं और चिता पर लेटने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।”