
खरगोन पॉक्सो कोर्ट का सख्त रुख, वायरल गर्ल से शादी के आरोपी फरमान को अग्रिम जमानत से इनकार
खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने वायरल गर्ल को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर कथित रूप से अपहरण कर उससे विवाह करने के आरोपी उत्तर प्रदेश निवासी 25 वर्षीय मोहम्मद फुरमान अली की अग्रिम जमानत याचिका बुधवार शाम खारिज कर दी।
मंडलेश्वर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश रवि जरोला ने बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी तथा वर्तमान में कोच्चि (केरल) में रह रहे मोहम्मद फरमान अली की पहली अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीरता और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी के खिलाफ महेश्वर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2), 81, 83 एवं 87, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) एवं 3(2)(va) के तहत मामला दर्ज है।
पीड़िता के पिता ने 25 मार्च 2026 को दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपी ने उनकी नाबालिग बेटी से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क किया, उसे फिल्मों में काम दिलाने का झांसा दिया, हवाई जहाज से केरल ले गया और वहां उससे विवाह कर लिया।
अभियोजन ने अदालत को बताया कि आरोपी ने युवती को केरल में अपने पास रखा, उसे परिजनों से मिलने नहीं दिया और बाद में उसके माता-पिता को भी बेटी को अपने साथ ले जाने से मना कर दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और फरार है। ऐसे में अग्रिम जमानत मिलने पर उसके द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है।
वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों के बीच संबंध सहमति से थे और युवती बालिग थी। इसके समर्थन में जन्म प्रमाण पत्र एवं विवाह पंजीयन सहित कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनमें युवती की आयु 18 वर्ष से अधिक बताई गई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि युवती के पिता पहले उसे फिल्म की शूटिंग के लिए स्वयं लेकर गए थे और उस समय उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
अभियोजन ने आरोपी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जन्म प्रमाण पत्र बाद में बनवाया गया है और यह सरकारी अभिलेखों से मेल नहीं खाता। अभियोजन ने पीड़िता के माता-पिता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनके अनुसार युवती की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 है। इस आधार पर घटना के समय वह नाबालिग थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, आरोपी ने जांच में शामिल होकर सहयोग नहीं किया है तथा पीड़िता की वास्तविक आयु का निर्धारण साक्ष्यों के विस्तृत परीक्षण के बाद ही विचारण के दौरान किया जाएगा। आरोपों की गंभीरता और जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।





