
खेजड़ी पर संकटः सोलर प्लांट की आड़ में कटते ‘कल्पवृक्ष’, पश्चिमी राजस्थान में आंदोलन तेज
Bikaner: खेजड़ी, जिसे पश्चिमी राजस्थान में जीवन, आस्था और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है, आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। वही खेजड़ी जिसकी पत्तियां और फूल भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं, जिससे विवाह के समय दूल्हा नई जीवन यात्रा की शुरुआत करता है, और जिसकी रक्षा के लिए 1730 में अमृता देवी बिश्नोई ने अपनी तीन बेटियों सहित 363 लोगों के साथ बलिदान दिया था। अब उसी खेजड़ी पर विकास के नाम पर सीधा प्रहार हो रहा है।
● सोलर प्लांट और खेजड़ी कटाई का बढ़ता विवाद
बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में पिछले तीन वर्षों से बड़े पैमाने पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के लिए जमीन साफ करने के नाम पर खेजड़ी के पेड़ों को काटकर हटाया जा रहा है। पर्यावरण संगठनों के अनुसार सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण से यह सामने आया है कि अब तक करीब 28 लाख खेजड़ी के पेड़ काटे जा चुके हैं। बिश्नोई समाज और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं बल्कि रेगिस्तान का कल्पवृक्ष है, जो मिट्टी को बांधने, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए अनिवार्य है।

● कमजोर कानून बना कटाई की बड़ी वजह
खेजड़ी कटाई का एक बड़ा कारण मौजूदा वन एवं पर्यावरण कानूनों की कमजोरी भी बताई जा रही है। वर्षों पुराने कानून में पेड़ काटने पर महज 100 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इतने मामूली दंड के कारण कंपनियां जुर्माना भरकर धड़ल्ले से खेजड़ी काट रही हैं और प्रशासन भी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
● ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग और आंदोलन
जुलाई 2024 से पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले ट्री प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग को लेकर बीकानेर कलेक्ट्रेट पर धरना चल रहा है। मांग है कि खेजड़ी कटाई पर एक लाख रुपए जुर्माना और कम से कम छह माह की सजा का प्रावधान किया जाए। जनवरी में बिश्नोई समाज की मुकाम में हुई महासभा में खेजड़ी बचाने के लिए निर्णायक संघर्ष का फैसला लिया गया। इसके बाद संत समाज की अगुवाई में 2 फरवरी से बीकानेर में ‘प्रकृति बचाओ महापड़ाव’ की घोषणा की गई।

● महापड़ाव और सरकार पर बढ़ता दबाव बीकानेर के पॉलीटेक्निक कॉलेज मैदान में बीते दिनों सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक महापड़ाव आयोजित किया गया। इसमें बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, बाड़मेर और फलोदी सहित प्रदेशभर से पर्यावरण प्रेमी, संत समाज, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि पहुंचे। वक्ताओं ने सोलर प्लांट के नाम पर खेजड़ी कटाई को विकास के नाम पर विनाश बताया और जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। सरकार पर दबाव बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से ट्री प्रोटेक्शन एक्ट बनाने का आश्वासन जरूर दिया गया है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन और कानून लागू नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर आरोप है कि सोलर कंपनियों के दबाव में रात के अंधेरे में खेजड़ी कटाई की घटनाएं अब भी नहीं रुकी हैं और पुलिस व प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा।

● प्रशासन से वार्ता बेनतीजा, आंदोलन तेज
पोकरण विधायक प्रतापपुरी सहित कुछ जनप्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने खेजड़ी कटाई पर तत्काल रोक और ठोस कानूनी गारंटी की मांग रखी। जिला प्रशासन के अधिकारियों से हुई वार्ता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद हजारों आंदोलनकारी रात में पॉलीटेक्निक कॉलेज मैदान से जिला कलेक्ट्रेट के पास स्थित पब्लिक पार्क में पड़ाव डालने रवाना हो गए।
● संतुलन और पहचान खतरे में
पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी को लेकर उठी यह आवाज सिर्फ पर्यावरण की नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी है। आंदोलनकारी साफ कह रहे हैं कि अगर अब भी कठोर कानून बनाकर खेजड़ी की रक्षा नहीं की गई, तो रेगिस्तान का संतुलन और समाज की सांस्कृतिक पहचान दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।





