हत्यारे सलमान ओर सद्दाम को शाहरुख की हत्या करने मामले में पर आजीवन कारावास, 5-5 हजार रुपए अर्थदंड!

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हत्यारे सलमान ओर सद्दाम को शाहरुख की हत्या करने मामले में पर आजीवन कारावास, 5-5 हजार रुपए अर्थदंड!

Ratlam : अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया ने शाहरुख की हत्या मामले में आरोपी सलमान और सद्दाम को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 5-5 हजार रुपए अर्थदंड लगाया। अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया की 21 जून 2020 को फरियादी लियाकत ने पुलिस को सुचना दी थी की ग्राम गंगाखेड़ी मे मेरी पत्नी और लड़के शाहरुख के साथ चचेरे भाई शेरू के लड़के जावेद की शादी में गए थे। शेरू की किराने की दुकान पर रात्रि 10 बजे शाहरुख खड़ा था और दुकान के सामने लाइट जल रही थी।

तभी वहां पर सद्दाम और सलमान आएं थे और सद्दाम के हाथ मे चाकू था और सलमान ने शाहरुख को पीछे से पकड़ लिया था एवं सद्दाम ने शाहरुख को जान से मारने की नियत से चाकू से सीने और पेट पर वार किए थे। शाहरुख के चिल्लाने पर असलम, मेहरबान और हयात उसे बचाने आए थे तो दोनों आरोपी वहां से भाग निकले थे। मौके पर उपस्थित लोगों ने घायल शाहरुख को मोटरसाइकिल से जिला अस्पताल पहुंचाया था। जहां डॉक्टरों ने चेकअप कर शाहरुख को मृत घोषित कर दिया था।

मृतक शाहरुख के पिता ने पुलिस को बताया था की शाहरुख के साथ आरोपी सद्दाम की पत्नी चली गई थी, जो वापस आकर सद्दाम के साथ रहने लगी थी, इसी रंजिश के कारण सद्दाम ने अपने भाई सलमान के साथ मिलकर शाहरुख की हत्या कर डाली थी। फरियादि की सुचना पर पुलिस चौकी सालाखेड़ी थाना स्टेशन रोड पर प्रकरण दर्ज किया गया था, आरोपी सद्दाम से घटना में प्रयुक्त चाकू जप्त किया जाकर उसका डीएनए परीक्षण करवाया गया था। पुलिस द्वारा इस प्रकरण को चिन्हित अपराध में शामिल किया गया था तथा मामला अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया के न्यायालय में पेश किया गया था। अभियोजन द्वारा साक्ष्यों के साक्ष्य, दस्तावेज एवं डीएनए रिपोर्ट न्यायालय में पेश की गई थी। न्यायालय द्वारा अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर अभियुक्त सद्दाम पिता वारिस खां और सलमान पिता वारिस खां निवासी ग्राम गांगाखेड़ी जिला रतलाम को शाहरुख की हत्या करने का दोषी पाते हुए दोनों आरोपियों को धारा 302/34 आईपीसी में आजीवन कारावास एवं 5-5 हजार रुपए अर्थदंड तथा आरोपी सद्दाम को आयुध अधिनियम की धारा 25(1)(b) में 2 वर्ष का कारावास ओर 1 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया। अभियोजन की और से पैरवी शासकीय अधिवक्ता संजीव सिंह चौहान के द्वारा की गई!