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सरकार का इंतज़ार छोड़, ग्रामीणों ने खुद उठाये फावड़े गेंती: 7 किमी कच्ची सड़क रिपेयर करने में जुटे सागमाल के ग्रामीण

सरकार का इंतज़ार छोड़, ग्रामीणों ने खुद उठाये फावड़े गेंती: 7 किमी कच्ची सड़क रिपेयर करने में जुटे सागमाल के ग्रामीण

बड़वानी: विकास की राह जब सरकारी फाइलों में अटक जाए, तो मजबूरी लोगों को खुद रास्ता बनाने पर मजबूर कर देती है। बड़वानी जिले के दूरस्थ पाटी विकासखंड के महाराष्ट्र सीमा से लगे सागमाल गांव में ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है। वर्षों से पक्की सड़क की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीण अब कुदाल, फावड़े और गैंती लेकर स्वयं करीब सात किलोमीटर कच्चे रास्ते की मरम्मत में जुट गए हैं। इसके लिए वे अपनी जेब से भी खर्च कर रहे हैं, ताकि जोरदार बारिश शुरू होने से पहले गांव का संपर्क पूरी तरह न टूटे।

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पीपरकुंड ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सागमाल तक झारड़ गांव के बाद आज तक पक्की सड़क नहीं बन सकी। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में सड़क का वादा किया गया, लेकिन हकीकत आज भी वैसी ही है।

गांव के मुन्ना नारगावे ने बताया कि सड़क खराब होने से किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री लाने में भारी परेशानी होती है। फसल बाजार तक पहुंचाना भी मुश्किल होता है। दोपहिया और ट्रैक्टर चलाना जोखिम भरा है। इसी कारण ग्रामीणों ने स्वयं रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

ग्रामीण चेंदा ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों को होती है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए मरीजों को करीब सात किलोमीटर तक झोली या अस्थायी पालने में उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि सड़क व इलाज के अभाव में लोग झाड़-फूंक करने वालों का सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई गर्भवती महिलाओं की रास्ते में ही प्रसूति हो चुकी है।

ग्रामीण सांचा और साय सिंह ने कहा कि उन्होंने विधायक, जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री तक को कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन सड़क निर्माण की मांग अब तक अधूरी है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि झारड़ से सागमाल तक सड़क बन जाती है तो न केवल गांव की जिंदगी आसान होगी, बल्कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की बेहतर कनेक्टिविटी भी स्थापित होगी। इससे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थल तोरणमाल तक पहुंच भी सुगम हो जाएगी।

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गूगल मैप का उपयोग कर प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल तोरण माल जा रहे बोकराटा गांव के तुकाराम पवार ने बताया कि बोकराटा से तोरणमाल की दूरी करीब 30 किलोमीटर है, लेकिन लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता बेहद पथरीला और खतरनाक है। वहीं पीपरकुंड के बाबूलाल ने बताया कि महाशिवरात्रि मेले में हजारों श्रद्धालु तोरणमाल पहुंचते हैं और मानसून में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने आते हैं। सड़क बनने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र सीमा से लगे गांवों की सड़क का मुद्दा कई बार विधानसभा में उठाया है। झारड़-सागमाल सड़क बनने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ तोरणमाल जाने वाले यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सर्वे में इस सड़क को शामिल कर बजट स्वीकृत किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे विधानसभा में यह मुद्दा लगातार उठाते रहेंगे।

वहीं बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह ने कहा कि सड़क निर्माण को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-4 के तहत आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी। साथ ही, ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे श्रमदान में ग्राम पंचायत की संभावित भूमिका और सहयोग की भी समीक्षा की जाएगी।