
Kissa-A-IPS:IPS Sandeep Karnik: अशोक खरात और TCS यौन प्रताड़ना कांड उजागर कर धूम मचा दी
IPS Sandeep Karnik: भारतीय पुलिस सेवा में महाराष्ट्र कैडर के 2004 बैच के IPS अधिकारी संदीप कार्णिक इस समय न सिर्फ महाराष्ट्र वरन पूरे देश में चर्चा में है। वे वर्तमान में नासिक में पुलिस आयुक्त के पद पर पदस्थ हैं और उन्होंने हाल ही में नासिक में बैक टू बैक दो बड़े ऑपरेशन करके हड़कंप मचा दिया है। दोनों ही ऑपरेशन अशोक खरात और TCS यौन प्रताड़ना कांड उजागर कर संदीप ने पूरे देश में धूम मचा दी है।
संदीप कर्णिक से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
संदीप कार्णिक ने बतौर नासिक पुलिस कमिश्नर बड़ी लकीर खींच दी है।।नासिक सीपी के तौर पर अशाेक खरात जैसे क्रिमिनल को बड़ी चालाकी से अरेस्ट किया। खरात के ऑफिस से वायरल हुए महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पर कड़ा कदम उठाया। 65 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
TCS की बीपीओ यूनिट में कथित तौर पर धर्मांतरण की कोशिशें और उत्पीड़न का खुलासा अंडरकवर ऑपरेशन में किया।

संदीप कार्णिक ने TCS की बीपीओ यूनिट में प्रारंभिक शिकायत मिलने के बाद सीक्रेट ऑपरेशन शुरू करवाया था। पुलिस को फरवरी 2026 में सबसे पहले यौन उत्पीड़न की गुप्त सूचना मिली। इसके बाद 6 महिला पुलिस अधिकारियों ने लगभग 40 दिनों तक कंपनी में हाउसकीपिंग और अन्य स्टाफ बनकर रहकर काम किया और सबूत जुटाए। संदीप कार्णिक की अगुवाई में ही शहर पुलिस ने नासिक में बैक टू बैक दो बड़े ऑपरेशंस को अंजाम दिया है।इसके बाद संदीप कार्णिक महिला सुरक्षा के मोर्चे पर सिंघम अधिकारी बनकर उभरे हैं। उनकी काम की हर कहीं तारीफ हो रही है। संदीप कार्णिक को मार्च महीने में ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक पुलिस कमिश्नरेट को महाराष्ट्र में 1 रैंक के लिए सम्मानित किया था। संदीप कार्णिक ने नासिक में दो बड़े ऑपरेशन ऐसे वक्त पर किए हैं जब नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को होगी। यह आयोजन 24 जुलाई, 2028 तक चलेगा।

कौन हैं संदीप कार्णिक ?
संदीप कर्णिक 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे अपनी कड़क छवि और आधुनिक पुलिसिंग के लिए जाने जाते हैं। नवंबर 2023 में नासिक के आयुक्त बने संदीप कार्णिक ने तकनीक-आधारित जांच, विशेष मोबाइल रिकवरी सेल और ‘लेट अस सर्व, नॉट रूल’ के दृष्टिकोण के लिए पहचान बनाई थी। वह पूर्व में मराठा आरक्षण हिंसा जांच (SIT) की अगुवाई कर चुके हैं। संदीप कार्णिक ने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में स्नातक (B.E.) के बाद मार्केटिंग में MBA और पुलिस प्रबंधन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। वे अभी तक अहमदनगर, ठाणे, नागपुर, जालना, नांदेड़ जिलों में काम कर चुके हैं। वे पुणे ग्रामीण के एसपी भी रह चुके हैं। 2011 मावल फायरिंग के मामले वह जरूर विवादों में आए थे। इसके बाद संदीप कार्णिक अच्छी पुलिसिंग के लिए चर्चा में हैं।

उन्होंने कई कार्यकारी पदों पर कार्य किया है और कानून प्रवर्तन में व्यापक अनुभव रखते हैं। नासिक पुलिस आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल में, उन्होंने नागरिक-हितैषी पहलों और मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों पर अंकुश लगाने में अपनी भूमिका के लिए पहचान हासिल की।
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अक्टूबर 2025 में, नासिक पुलिस आयुक्त के रूप में सेवा करते हुए, उन्होंने नासिक जिला कायदाचा बल्लेकिल्ला नामक एक पुलिस अभियान शुरू किया , जिसका अर्थ है “नासिक जिला, कानून का किला।” इस अभियान में लक्षित निवारण और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिसिंग विधियों का उपयोग किया गया । पुलिस ने आपराधिक गिरोहों, जबरन वसूली समूहों और राजनीतिक संबंधों वाले अपराधियों की पहचान की और उनके खिलाफ समन्वित कार्रवाई की।

विवादों से भी रहा है नाता
संदीप अपने पुलिस करियर में दो विवादों के लिए भी जाने जाते हैं।
अगस्त 2011 में, पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत रहते हुए, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (मावल) पर पुलिस फायरिंग की घटना घटी। इस घटना में चार किसानों की मौत हो गई, जिसके बाद बल प्रयोग की उपयुक्तता को लेकर आरोप लगे, और दावा किया गया कि फायरिंग बिना किसी उकसावे के की गई थी और हवा में नहीं चलाई गई थी। एक महीने के भीतर, राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति एमजी गायकवाड़ की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग नियुक्त किया। लेकिन आयोग को उन्हें किसी भी चोट से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला और उसने केवल कुछ अधिकारियों के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भी याचिकाओं की सुनवाई करते हुए इस निर्णय को बरकरार रखा और पुष्टि की कि उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

नासिक दरगाह विध्वंस अभियान
16 अप्रैल, 2025 को, बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित सतपीर बाबा दरगाह को निशाना बनाकर चलाए गए विध्वंस अभियान के दौरान नासिक में हिंसा भड़क उठी। पुलिस के साथ झड़पों में 21 अधिकारी घायल हो गए। मामला विचाराधीन होने के बावजूद, संरचना को ध्वस्त कर दिया गया, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय ने आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी और स्पष्टीकरण मांगा। नासिक पुलिस आयुक्त के रूप में कर्णिक ने घटना से पहले अशांति भड़काने के प्रयासों के बारे में खुफिया जानकारी पर ध्यान दिया, जिसके कारण पुलिस ने पूर्वव्यापी कार्रवाई की। इसके बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विध्वंस नोटिस के खिलाफ दरगाह ट्रस्ट की विशेष अनुमति याचिकाओं को स्वेच्छा से वापस लेने की अनुमति दी।
फिलहाल पूरे महाराष्ट्र में महिला सुरक्षा के मोर्चे पर संदीप की चौतरफा तारीफ हो रही है।





