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हमारे यहां प्राचीन समय में एक पद्धति होती थी जिसे हम अभी आसान रूप से इस प्रकार कर सकते हैं कि जब हम नहाये तब चुल्लू में पानी ले और नाक के जरिए पानी को अंदर खींचे है और फिर नाक छिंक कर उसकी सफाई कर ले। उसी प्रकार से हम गरारे करें चाहे सादे पानी से चाहे गरम पानी से और गले को स्वच्छ रखने की कोशिश रखें। यदि हम यह प्रक्रिया दिन में दो-तीन बार करेंगे तो नाक और गले में वायरस टिक नहीं पाएगा। रोज कम से कम 10 फुग्गे फुलाना, प्राणायाम करना। कपूर अजवाइन और लॉन्ग की पोटली बनाकर थोड़ी थोड़ी देर में उसे सुंघना। लाल प्याज सेंधा नमक के साथ खाना।
जैन परिवार ऊकाली पीते हैं जिसमें सोठ, अदरक, काली मिर्च, लेंडी पिपर वगैरा सब मिले रहते हैं। नीम की पत्ती खाना, नींबू पानी, खट्टे फ्रूट जैसे संतरा आदी। सब्जियों में करेला मेथी पालक गाजर शलजम ककड़ी आदि का सलाद खूब खाना। खड़े मसाले वापरे। किसी भी काम की इतनी मेहनत करना कि पसीना निकले, पसीना आना आवश्यक है। सैर सपाटा, योगा, साइकिलिंग जो भी कर सके। सीलन भरी जगह और बदबूदार जगह पर नहीं रहना। ताजी हवा और धूप दोनों शरीर के लिए आवश्यक है।





