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Liquor Shop Scam : फर्जी बैंक गारंटी से शराब दुकान आवंटित, अफसरों की भूमिका संदेह

78 लाख अर्नेस्ट मनी भी जमा नहीं, लाइसेंस फीस के 15 करोड़ भी ले भागा

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Indore : फर्जी बैंक गारंटी से शराब ठेका लेने का नया मामला सामने आया। इसमें आबकारी विभाग के दो बड़े अफसरों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। झारखंड के दो ठेकेदारों ठेकेदार मोहन कुमार और अनिल सिन्हा ने सांठगांठ करके साढ़े 4 करोड़ रुपए की फर्जी बैंक गारंटी दी। आबकारी विभाग की 78 लाख की धरोहर राशि (Earnest Money) भी जमा नहीं करवाई और लाइसेंस फीस और अन्य शुल्क भी जमा नहीं किया। लाइसेंस शुल्क के ही 15 करोड़ रुपए बकाया हो गए थे।
जब यह मामला सामने आया, तब तक वह ठेकेदार दुकान बंद करके भाग गया। अब विभाग के अफसर अब करोड़ों के इस घोटाले को दबाने में लगे हैं। पूरे मामले में इंदौर के आबकारी विभाग के डिप्टी कमिश्नर संजय तिवारी और असिस्टेंट कमिश्नर राजनारायण सोनी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक झारखंड के एक शराब ठेकेदार ने इंदौर के एमआईजी चौराहे पर शराब दुकान नीलामी प्रक्रिया में ली थी। नियम के मुताबिक ठेकेदार को विभाग को 4.62 करोड़ की बैंक गारंटी और 78 लाख की अर्नेस्ट मनी जमा करना थी। उसने अफसरों से साठगांठ करके जमा नहीं करवाई।
बैंक गारंटी की जांच के बिना ही झारखंड से आए इस ठेकेदार को शराब दुकान आवंटित कर दी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेकेदार ने करीब तीन महीने तक अपने दुकान से करोड़ों की शराब बेच दी और इसके बाद वह अचानक गायब हो गया। ठेकेदार के अचानक भाग जाने से विभाग में हड़कंप मच गया। इसके साथ ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया।

जब भागे तो जांच की गई
ठेकेदार के भागने के बाद अफसरों ने दस्तावेजों की जांच करवाई तो पता चला कि 4 करोड़ 62 लाख रुपए की बैंक गारंटी फर्जी है। इतना ही नहीं जब बैंक गारंटी के दस्तावेज लगाए गए थे, तब असिस्टेंट कमिश्नर आबकारी इंदौर राजनारायण सोनी ने इसका सत्यापन भी नहीं करवाया। इसके अलावा इस ठेकेदार से आबकारी विभाग के अफसरों ने 78 लाख रुपए की धरोहर राशि भी नहीं ली। फर्जी बैंक गारंटी और धरोहर राशि जमा नहीं करने के बाद इस ठेकेदार ने शराब बेची, लेकिन लाइसेंस फीस और अन्य शुल्क जमा नहीं किया। लाइसेंस शुल्क के उस पर 15 करोड़ रुपए बकाया हो गए थे।

पड़ताल बिना दुकान आवंटन
इस पूरे मामले में राजनारायण सोनी और संजय तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। राजनारायण सोनी ने दुकान आवंटित करने से पहले बैंक गारंटी के दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं करवाई। साथ ही बिना अर्नेस्ट मनी जमा किए कैसे दुकान का संचालन ठेकेदार को सौंप दिया! इसके अलावा लाइसेंस फीस और अन्य शुल्क जो शराब बिक्री पर विभाग को लेना चाहिए था, वह क्यों नहीं वसूला गया। आखिर क्या वजह थी जो झारखंड से आए ठेकेदार पर विभाग विशेष मेहरबानी दिखा रहा था। संजय तिवारी ने भी अपनी भूमिका नहीं निभाई। उन्हें जब इस मामले की जानकारी मिली, तब उन्होंने अपने मातहत राजनारायण सोनी को न कोई नोटिस दिया और न मामले की जांच कराई। एक तरह से तिवारी ने भी सब जानकारी होने के बावजूद मामले में चुप्पी साधे रखी।

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ऐसे घोटाले नई बात नहीं
फर्जी चेक और कागजों के आधार पर बैंक गारंटी से आबकारी के ठेके लेना नई बात नहीं है। 2012-13 से 2017-18 के दौरान इंदौर में शराब ठेकेदारों ने करोड़ों की बैंक गारंटी पंजाब एंड सिंध बैंक राजबाड़ा से ली थी। बैंक प्रबंधन की मदद से प्रॉपर्टी का ओवर वैल्यूवेशन करते हुए और आधे-अधूरे कागजों से यह गारंटी कागज जारी होते रहे और इन्हें आबकारी विभाग करोड़ों के ठेके जारी करता रहा। यह बैंक गारंटी घोटाला 150 करोड़ से ज्यादा का बताया जा रहा है। खुद बैंक की इंटरनल रिपोर्ट में इसके बारे में टिप्पणी की गई। सितंबर 2021 में इसी मामले में ईओडब्ल्यू इंदौर में शिकायत होने पर बैंक पर छापा मारकर दस्तावेज जब्त किए गए थे। जिला प्रशासन ने भी बैंक गारंटी जांचने की कमेटी बनाई, लेकिन कमेटी ने कोई जांच नहीं की।