
Lucknow Fire Tragedy: ‘हादसा’ नहीं ‘हत्या’ है यह, दोषी है पूरा सिस्टम!
निर्मल सिरोहिया
उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिनदहाड़े 15 मासूम विद्यार्थियों की ‘निर्मम हत्या’ कर दी गई। …हां ‘हत्या’ ही है यह।
लखनऊ के अलीगंज के एक एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर में आग में झुलसकर हुई मौत ‘हादसा’ नहीं है। जिम्मेदार है राज्य सरकार, भवन निर्माता, शिक्षण संस्थान संचालक, स्थानीय प्रशासन और फायर सुरक्षा विभाग। इन सब पर ‘हत्या’ का प्रकरण दर्ज़ करें। अब जांच नहीं चाहिए, उसका कोई औचित्य भी नहीं है।
कब तक यूं ही बेबसी के आंसू बहाए जाएंगे। दिल्ली से लेकर गुजरात और बिहार से लेकर उत्तरप्रदेश तक वर्षों से एक सी लापरवाही और उसके परिणामस्वरूप होने वाली दुर्घटनाओं के लिए सिर्फ कुछ लोग ज़िम्मेदार नहीं हैं, बल्कि पूरा सिस्टम दोषी है।
सिस्टम जिसे सुधारने के आपके तमाम दावे खोखले हैं। सिस्टम, जो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है। जनप्रतिनिधि जो सत्ता लोलुप होकर रात-दिन अपनी आस्थाएं बदल रहे हैं।
आम आदमी आपकी आकांक्षाओं को पूरा करने की कीमत कई रूप में चुका रहा है। सड़कों पर जान देकर, आग में झुलसकर, अस्पतालों में मोटी फीस और दवाओं की अनियंत्रित कीमत चुकाकर, महंगी शिक्षा के बाद रोजगार के लिए दर-दर भटककर और फिर बेबसी में अपनी जान देकर… यह ऐसा सिलसिला है, जिसका कोई अंत नहीं।
और हां, इन दिनों आस्था और विश्वास की चोरी तो जग जाहिर है ही..। …बस अब और नहीं..! जांच नहीं, फैसले चाहिए, गिरफ्तार कीजिए, हर उस शख़्स को जो गुनाह की पृष्ठभूमि तैयार करने का दोषी है और ऐसी सजा दीजिए, जो नज़ीर बने।





