प्रदेश में वाहनों की मैन्युअल फिटनेस जांच हुई बंद,अब केवल ATS पर होगी जांच,छोटे वाहन चालकों की बढ़ी मुसीबत  

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प्रदेश में वाहनों की मैन्युअल फिटनेस जांच हुई बंद,अब केवल ATS पर होगी जांच,छोटे वाहन चालकों की बढ़ी मुसीबत

 

भोपाल: पूरे मध्यप्रदेश में अब केवल आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों पर ही वाहनों को फिटनेस देने के लिए जांच हो सकेगी।परिवहन विभाग ने मैन्युअल फिटनेस सेंटरों को बंद कर दिया है। इसके चलते कई छोटे शहरों में वाहन चालको की दिक्कते बढ़ गई है। उन्हें अब वाहनों की फिटनेस जांच कराने के लिए दूसरे शहरों में अपने वाहन ले जाना पड़ता है।

केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने मध्यप्रदेश में केवल भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सतना, देवास और सिंगरौली में ही आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन संचालित हो रहे है इन्हीं सेंटरों पर अब वाहनों की फिटनेस जांच की जाएगी। ये फिटनेस सेंटर निजी कंपनियों, संस्थाओं द्वारा संचालित है। सीमित शहरों तक की वाहनों की फिटनेस जांच के लिए आटोमेटिक फिटनेस जांच सेंटर होंने के कारण नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, रीवा, सीधी, सतना, विदिशा, सीहोर, रायसेन, खुडवा, मुरैना, रतलाम, शाजापुर, नरसिंहपुर, कटनी, डिंडौरी मंडला सहित तमाम छोटे जिलों में होंने वाली वाहनों की मैन्युअल जांच बंद कर दी गई है। इन जिलों के वाहन चालकों को अब एटीएस वाले दूसरे जिलों में अपने वाहनों का फिटनेस कराने जाना पड़ रहा है।

आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस नई दिल्ली की आरटीओ ट्रेफिक कमेटी के अध्यक्ष सीएम मुकाती ने परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सचिव परिवहन मनीष सिंह और परिवहन आयुक्त मनीष सिंह को पत्र लिखकर सभी छोटे शहरों में जब तक एटीएस शुरु नहीं हो जाते वहां मैन्युअल फिटनेस जांच शुरु रखने की मांग की है। उन्होंने परिवहन विभाग से मांग की है कि सभी जिलों में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरु किए जाएं।उन्होंनें एटीएस के माध्यम से अनिवार्य फिटनेस प्रक्रिया के निर्देशों से छोटे जिलों में वाहन मालिकों को हो रही परेशानी का जिक्र करते हुए कहा है कि केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने 26 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर मध्यप्रदेश में एक जनवरी 2026 से मध्यप्रदेश में आरटीओ ,डीटीओ द्वारा वाहनों की मैन्युअल फिटनेस प्रकिया बंद कर केवल आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के जरिए ही वाहनों की फिटनेस जांच करने के निर्देश जारी किए है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में एटीएस सीमित स्थानों पर है जिसके चलते छोटे कस्बे और शहरों के वाहन मालिकों को सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर जाकर वाहनों की फिटनेस जांच कराना पड़ रहा है। इससे वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। समय की बर्बादी हो रही है। ईधन की अनावश्यक खपत बढ़ रही है। छोटे ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है। दूसरे शहरों मेंं फिटनेस जांच कराने जाने के कारण वाहन और चालक को व्यापार से बाहर रहना पड़ता है इससे भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने एटीएस शुरु होंने तक मैन्युअल जांच शुरु रखने का आग्रह किया है।

आठ एटीएस केन्द्रों के भरोसे पूरे प्रदेश के वाहन-

इंदौर में वेदांती व्हीकल फिटनेस एपीवी है इस पर धार खरगौन, भोपाल में वेदांती व्हीकल फिटनेस एसपीवी पर सीहोर, रायसेन, विदिशा, गुना, राजगढ़, ग्वालियर में वेदांती व्हीकल फिटनेस एसपीवी पर मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, उज्जैन में एसएस स्टोन्स पर रतलाम, आगरमालवा, शाजापुर, धार, जबलपुर में मनाली इंडस्ट्री पर नरसिंहपुर, दमोह, कटनी, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, उमरिया, सतना जिले में श्री राम कल्याण बिल्डकान पर रीवा, सीधी, उमरिया, कटनी, पन्ना, शहडोल, सिंगरौली में रुद्र इंटरप्राइजेस पर सीधी और देवास जिले में अप्पू नावेल सर्विस पर शाजापुर, सीहोर, हरदा, खंडवा, खरगौन के वाहन चालकोें को फिटनेस जांच कराने जाना पड़ रहा है।