
माओवादियों का पुनर्वास सुस्त, 3 महीने बीते 8 को ही मिल सका लाभ, बाकी इंतजार में
भोपाल: सरेंडर करने वाले सभी माओवादियों को पुनर्वास का लाभ तीन महीने बीतने के बाद भी शासन, प्रशासन और पुलिस मिलकर नहीं दिला सकें हैं। प्रदेश में दिसंबर में कई नक्सलियों ने प्रदेश सरकार की नक्सल पुनर्वास एवं राहत नीति 2023 के तहत आत्मसमर्पण किया था। इनमें से अब तक महज 8 माओवादियों को ही सरेंडर पॉलिसी का लाभ मिल सका है। सरेंडर करने वाले बाकी के माओवादी अब भी पुनर्वास का लाभ पाने का इंतजार कर रहे हैं।
दिसंबर 2025 में मध्य प्रदेश में 13 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, लेकिन अब तक शासन, प्रशासन और मध्य प्रदेश पुलिस केवल 8 को ही सरेंडर पॉलिसी का लाभ दिला सके हैं। जिन 8 माओवादियों को लाभ मिला है, उनके दस्तावेज पूरे होने के बाद उनके खातों में राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, बाकी 5 मामलों में कागजी औपचारिकताएं अधूरी होने से लाभ अटका हुआ है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जिन माओवादियों को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके पास नागरिकता और पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं थे। ऐसे में प्रशासन और पुलिस अब सक्रिय रूप से उनके दस्तावेज तैयार कराने में जुटे हैं। इसके तहत संबंधित गांवों के सरपंचों से बर्थ सर्टिफिकेट बनवाए जा रहे हैं, मनरेगा के तहत जॉब कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे राशन कार्ड बन सके। इसके साथ ही वोटर आईडी, आधार कार्ड और बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है, ताकि राशि सीधे खातों में ट्रांसफर की जा सके। करीब तीन महीने पहले एमएमसी जोन में सक्रिय इन माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इन पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कुल 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें एक बालाघाट का निवासी है, जबकि अन्य छत्तीसगढ़ के बताए गए हैं।
*33 लाख रुपये तक का प्रावधान*
मध्य प्रदेश की नक्सल पुनर्वास एवं राहत नीति 2023 के तहत सरेंडर करने वाले माओवादियों को अधिकतम 33 लाख रुपये तक का पैकेज दिया जाता है, जिसमें प्रोत्साहन राशि, मकान निर्माण, संपत्ति खरीद, शादी सहायता और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं।





