
MP News: कान्हा में शावक और बालाघाट में वयस्क बाघ की मौत, जनवरी से अब तक मृत टाइगरों की संख्या 23 हुई
गणेश पांडे की रिपोर्ट
भोपाल। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में शावक और बालाघाट में वयस्क बाघ मृत पाए गए। इसके साथ ही मप्र में मृत टाइगरों की संख्या बढ़कर 23 हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में एक शावक मृत पाया गया, जबकि बालाघाट जिले से एक वयस्क बाघ का शव बरामद किया गया, जिससे मध्य प्रदेश में इस वर्ष बाघों की मृत्यु की संख्या 23 हो गई है।
मप्र में लगातार बढ़ रहे बाघों की मौत के आंकड़े बढ़ रहा है। प्राप्त आकड़ों के मुताबिक साल 2021 में 34 बाघों की मौत हुई थी। 2022 में 43, साल 2023 में 45 बाघों की जान गई। साल 2024 में 46 बाघों की मौत हुई। साल 2025 में 55 तक पहुंच गया। जनवरी 26 से 21 अप्रैल तक 23 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क के बाहरी इलाकों में हुई।
अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्रीय लड़ाई, बुढ़ापा, बीमारियां, अवैध शिकार और बिजली का करंट बाघों की मौत के कुछ प्रमुख कारण हैं। क्षेत्र की लड़ाई से सबसे अधिक टाइगर की मौत हुई है।
टाइगर की बढ़ती आबादी, छोटी पड़ने लगी टेरिटरी
प्रदेश में टाइगर की आबादी तेजी से बढ़ रही है। नेशनल पार्क के क्षेत्रफल बढ़ती आबादी के कारण टाइगर की टेरिटरी छोटी पड़ने लगी हैं। टाइगरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त नेशनल पार्क सेंचुरी बनाने की आवश्यकता है। प्रदेश में लगातार कटते जंगल बाघों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यहां पिछले 5 साल में हर दिन औसतन 10 हेक्टेयर जंगल खत्म हो रहा है।

यह जानकारी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने 28 जुलाई 25 को कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के सवाल पर संसद में दी। उनके मुताबिक, देश में सबसे ज्यादा जंगल MP में खत्म हो रहे हैं। 2018 से 2023 के बीच MP में 19,270 हेक्टेयर जंगल खत्म हुआ।
मुख्य उपाय दिए
टाइगर की टेरिटरी फाइट (क्षेत्रीय लड़ाई) रोकने के लिए मुख्य रूप से वन प्रबंधन और बाघों के आवास (habitat) में सुधार करना जरूरी है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इंसानी हस्तक्षेप से इसे कम किया जा सकता है।
पर्याप्त जगह और सुरक्षा: बाघों के लिए सुरक्षित और बड़े क्षेत्र सुनिश्चित करें। अगर क्षेत्र बड़ा होगा, तो युवा बाघ अपनी नई टेरिटरी आसानी से बना पाएंगे, जिससे पुरानी बाघों के साथ संघर्ष कम होगा।
* शिकार (Prey) की संख्या बढ़ाना: अगर जंगल में पर्याप्त हिरण और अन्य शिकार होंगे, तो बाघों को भोजन के लिए एक-दूसरे के इलाके में नहीं जाना पड़ेगा। भोजन की कमी ही अक्सर लड़ाई का मुख्य कारण होती है।
* कॉरिडोर (Corridors) का विकास: विभिन्न जंगलों को जोड़ने वाले ‘कॉरिडोर’ बनाए रखें ताकि युवा बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल जा सकें और पुरानी टेरिटरी पर कब्जा करने के लिए न लड़ें।
* मॉनिटरिंग (Monitoring): वन विभाग द्वारा रेडियो कॉलर के माध्यम से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखें ताकि संघर्ष की संभावना वाले बाघों को अलग किया जा सके।
* स्थान स्थानांतरण (Translocation): अगर किसी क्षेत्र में बाघों की संख्या बहुत अधिक हो गई है, तो उन्हें दूसरे सुरक्षित अभयारण्यों में स्थानांतरित (shift) करना चाहिए।





