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MP News: सवा करोड़ का गोलमाल, सरकारी बाबू ने दूसरोंं का रुपया स्वयं,पत्नी और बच्चों के खातों में डाला

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MP News: सवा करोड़ का गोलमाल, सरकारी बाबू ने दूसरोंं का रुपया स्वयं,पत्नी और बच्चों के खातों में डाला

भोपाल. दतिया जिले की सेवढ़ा जनपद पंचायत में पदस्थ लिपिक देवेन्द्र सक्सेना ने शासकीय धन का सवा करोड़ रुपए का गोलमाल किया है। उसने पंचायत में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों और वेंडरों का रुपया अपने खुद के बैंक खाते और अपनी पत्नी शीला सक्सेना, बच्चों शुभम, चित्रांश सक्सेना और पुत्रियों अनु तथा बीनू सक्सेना के बैंक खातों ट्रांसफर कर लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बाबू के कृत्य की जिले के कलेक्टर, जिला पंचायत और जनपद पंचायतों में काम करने वाले सीईओ तक को भनक नहीं लगी और यह सारा माल लेकर सेवानिवृत्त भी हो गया। अब दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के निर्देश पर जांच कमेटी गठित कर जनपद पंचायत सीईओ इस पूरे मामले की जांच शुरु करा रहे है।

सूत्रों के मुताबिक दतिया जिले की जनपद पंचायत सेवढ़ा में सहायक वर्ग दो के पद पर पदस्थ देवेन्द्र सक्सेना ने वर्ष 2018 से वर्ष 2013 के बीच सुनियोजित तरीके से शासकीय राशि का गबन किया। उसने जनपद पंचायत के अन्य कर्मचारियों और वेंडरों को दिए जाने वाले शासकीय धन को बड़े ही रोचक तरीके से अपने खुद के बैंक खाते और अपने रिश्तेदारों के खाते में डाल लिया। एक करोड़ 24 लाख 63 हजार 875 रुपए उसने अपने बैंक खातों में डाल लिए। इसके लिए उसने अन्य कर्मचारियों और वेंडरों के नाम तो यथावत रहने दिए उन कर्मचारियों और वेंडरों के बैंक खातों की जगह उसने अपने स्वयं के बैंक खाते, पत्नी शीला सक्सेना, अपने पुत्र शुभम और पुत्रियों अनु तथा बीनू सक्सेना के बैंक खाते डालकर राशि ट्रांसफर कर दी। राशि लेने वाले लोगों के नाम तो वहीं रहे लेकिन पैसा उनके खातों में पहुंचने की जगह देवेन्द्र और उसके रिश्तेदारोेंं के बैँक खातों में जाता रहा। किसी को इसकी भनक भी नहीं लगी। अब चूंकि सारे भुगतान ऑनलाइन आईएफएमआईएस के जरिए होंने लगे है तो जब सारे भुगतान राज्य स्तर पर आडिट के दौरान पकड़ में आए। अब जब कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत सीईओ को इस मामले की जांच के निर्देश दिए है।

जनपद सीईओ शर्मा का कहना है कि 2018 से 2023 के बीच ये राशि ट्रांसफर हुई है। वे स्वयं यहां 2025 में आए है। पूरे मामले की जांच समिति बनाकर की जाएगी। देवेन्द्र सक्सेना सेवानिवृत्त हो चुके है। अब उनके द्वारा गबन की गई राशि की ट्रेजरी आफीसर और अन्य अधिकारियों की जांच कमेटी बनाकर जांच की जाएगी।

इस तरह हुआ गोलमाल-

कुल 24 बार राशि अवैधानिक रुप से ट्रांसफर की गई है। देवेन्द्र सक्सेना ने 2018 से 2023 के बीच खुद के बैक खाते में प्रभूदास एक्का और अन्य के पेबिल, एमपीटीसी, पे एरियर टीए बिल, जीपीएफ और एडवांस के रुप में 45 लाख 52 हजार 184 रुपए ट्रांसफर कर लिए। इसी तरह मायाराम सिंह, शंभूदयाल शर्मा, विजय कुमार खेमरिया के ग्रांट पे बिल के 12 लाख 50 हजार रुपए खुद के खाते में ट्रांसफर कर लिए।

उन्होंने पत्नी शीला सक्सेना के खाते में महेश कुमार ओम प्रकाश सेंगर और कालीचरण शर्मा के ग्रांट पे बिल के 13 लाख 27 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। बेटी अनु सक्सेना के बैंक खाते में बिजेन्द्र सिंह मनोज कुमार रामस्वरुप के ग्रांट पे के चार लाख 51 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। बेटे शुभम चित्रांश के खाते में केसी शर्मा रामािया के पे एरियर, एमपीटीसी एरियर के बिलों की 21 लाख 82 हजार रुपए की राशि ट्रांसफर कर दी। महेश प्रताप सिंह के खाते में शिवनारायण रमेश्वर दयाल राजपूत और कालू सिंह के पेबिल और एरियर की राशि के 9 लाख 93 हजार रुपए अवैधानिक रुप से ट्रांसफर किए गए।

देवेद्र सक्सेना के खाते मे गंदर्भ सिंह और भारत सिंह की राशि, शुभम के खाते में सुनील, अनिल श्रीवास्तव को दी जाने वाली राशि, मृदुल सक्सेना के ख्पाते में एम कुमार, अनिल कुमार श्रीवास्तव को दी जाने वाली राशि ट्रांसफर कर दी। इस तरह कुल 23 बार दूसरों को दी जाने वाली राशियां अपने स्वयं और रिश्तेदारों के बैँक खातों में ट्रांसफर कर दी। इसके अलावा चार मामलों में व्यक्त्गित वेतन मद में अधिक भुगतान भी कर दिया गया।