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Newspaper Ink is Harmful: अखबार पर खाना खाना भी जानलेवा साबित हो सकता है

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Newspaper Ink is Harmful: अखबार पर खाना खाना भी जानलेवा साबित हो सकता है

डॉ. तेज प्रकाश  व्यास
अखबार की स्याही (Printing Ink) में लिपटे समोसे, कचोरी या वड़ापाव का स्वाद भले ही लुभावना लगे, लेकिन वैज्ञानिक और शोध आधारित दृष्टिकोण से यह आपके स्वास्थ्य के लिए एक “धीमा जहर” (Slow Poison) है। हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटने या परोसने पर सख्त प्रतिबंध लगाया है।

​वैज्ञानिक अनुसंधानों (Research Papers) के आधार पर, अखबार में भोजन करने से होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसानों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण नीचे दिया गया है:

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​1. लेड (सीसा) का जानलेवा प्रभाव:

85% मानसिक और शारीरिक खतरा
​अखबार की स्याही में लेड (Lead/Pb) की भारी मात्रा होती है। जब गर्म, तैलीय या खट्टा भोजन इस स्याही के संपर्क में आता है, तो लेड पिघलकर भोजन में मिल जाता है (Chemical Migration)।

​मस्तिष्क पर घातक असर (Neurotoxicity):

लेड सीधे मनुष्य के Blood-Brain Barrier (मस्तिष्क की सुरक्षा दीवार) को पार कर जाता है। यह न्यूरॉन्स को नष्ट करता है, जिससे याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और बच्चों में आईक्यू (IQ) का स्तर कम होना जैसी गंभीर मानसिक विकृतियां होती हैं।

​किडनी और अंगों की विफलता (Renal Damage):

शरीर में प्रवेश करने के बाद लेड हड्डियों और किडनी में जमा होने लगता है। लंबे समय तक इसके सेवन से किडनी स्थायी रूप से खराब हो सकती है।

​2. बायोएक्टिव तत्व और पाचन तंत्र का विनाश:

70% तक जोखिम
​वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, रिसाइकल किए गए कागज और छपाई की स्याही में कई तरह के बायोएक्टिव घटक (Bioactive Elements) और थैलेट्स (Phthalates) पाए जाते हैं।

​गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डैमेज:

यह केमिकल हमारे पेट की अंदरूनी परत (Mucosal Lining) को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
​इसके कारण क्रोनिक एसिडिटी, पेट में अल्सर, पाचन क्रिया का पूरी तरह असंतुलित होना और लिवर की कार्यप्रणाली में बाधा (Hepatotoxicity) उत्पन्न होती है।

3. हानिकारक सॉल्वैंट्स और कैंसर का चक्रव्यूह:

60% कैंसर का खतरा
​अखबार छापने वाली स्याही को सुखाने और बांधने के लिए नाफ्थिलामाइन (Naphthylamines) और एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Aromatic Hydrocarbons) जैसे खतरनाक सॉल्वैंट्स का उपयोग किया जाता है।

कार्सिनोजेनिक प्रभाव (Carcinogenic Effect):

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कैंसर अनुसंधान संस्थाओं के अनुसार, ये रसायन सीधे तौर पर कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचाते हैं।
​गर्म भोजन के माध्यम से जब ये शरीर में जाते हैं, तो पेट का कैंसर (Gastric Cancer), मलाशय का कैंसर और फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना को 60% तक बढ़ा देते हैं।

​4. माइक्रोबायोलॉजिकल संक्रमण (बैक्टीरिया का हमला)

​केमिकल्स के अलावा, अखबार छपने से लेकर, परिवहन और हॉकरों के हाथों से गुजरते हुए अत्यधिक धूल, गंदगी और अस्वच्छ वातावरण का सामना करता है।
​इस पर Staphylococcus और Bacillus cereus जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पनपते हैं, जो भोजन के संपर्क में आते ही पेट में गंभीर संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और डायरिया का कारण बनते हैं।

वैज्ञानिक सलाह:

​लिपुल्य तेल और गर्मी (Lipid-assisted Migration):

समोसे या पकोड़े का तेल एक ‘सॉल्वेंट’ की तरह काम करता है जो अखबार की सूखी स्याही को तुरंत सोख लेता है। इसलिए भोजन चाहे कितना भी शुद्ध घी या तेल में बना हो, अखबार पर आते ही वह विषाक्त (Toxic) हो जाता है।

​बचाव के उपाय:

​हमेशा खाद्य-ग्रेड (Food-Grade) बटर पेपर, केले के पत्ते या अनप्रिंटेड टिशू पेपर का उपयोग करें।
​बाजार में किसी भी चाट या स्नैक्स वाले को अखबार का उपयोग न करने दें; अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।

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