No Muktidham in Mandu : मुक्तिधाम नहीं होने से बारिश में अंतिम संस्कार मुश्किल

आज दोपहर में एक महिला की मृत्यु पर उसके दाह संस्कार में परेशानी आई

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धार से छोटू शास्त्री की रिपोर्ट

Mandu (Dhar) : मांडू को विश्व पर्यटन स्थल माना जाता है। लेकिन, पर्यटकों के सुविधाओं का अभाव तो है ही, यहाँ के लोग भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। व्यवस्थाओं में कमी होने से मांडू में पर्यटकों की संख्या भी लगातार गिर रही है। अब यहां आने वाले पर्यटक भी मांडू से खिन्न होकर लौटने लगे हैं। मांडू में मुक्तिधाम तक नहीं है। इस कारण बाज बहादुर महल के नीचे रेवा कुंड के पास खुले में ही कई सालों से खुले में दाह संस्कार किया जाता है।

मांडू में आज तक मुक्तिधाम का निर्माण नहीं सका, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन, बरसात में यहां अंतिम संस्कार करना किसी मुसीबत से कम नहीं हैं।

बुधवार दोपहर में नगर के वार्ड क्रमांक 4 की महिला योगिता परिहार का दाह संस्कार मुक्तिधाम नहीं होने के कारण चलती बारिश में हुआ। मुक्तिधाम नहीं होने से बरसात में तिरपाल का सहारा लिया जाता है। बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। मुक्तिधाम नहीं होने के कारण आज बारिश में ही दाह संस्कार किया गया।

जनप्रतिनिधि के दावों की जमीनी हकीकत इससे बयां हो जाती है। मांडू नगर परिषद की सीएमओ मीनाक्षी पाटीदार ने बताया की इस समस्या का समाधान शीघ्र कर लिया जाएगा। लेकिन, उनके पास इस सवाल का जवाब नहीं है कि अभी तक ये जरूरत महसूस क्यों नहीं की गई!

मांडू विश्व पर्यटन स्थल के नाम से जाना जाता है। जबकि, यहां मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। मांडू और आसपास के क्षेत्र में एक भी मुक्तिधाम नहीं होने के कारण ग्रामीण काफी परेशान हैं। बारिश के समय में शव का अंतिम संस्कार करने की चिंता हमेशा ग्रामीणों को सताती रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि हमने कई बार मुक्ति धाम के निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं।

मांडू नगर के अन्तर्गत अपने वाले ऐसे कई गांव हैं, जहां मुक्तिधाम नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मांडू के रेवा कुंड खुले में मुक्तिधाम न होने के कारण खुले में शव का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। एक तरफ शासन द्वारा मांडू पर्यटन स्थल अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन, कई मांडू सहित मांडू से जुड़े गांव शासन की इन योजनाओं से वंचित हैं।

हालत ज्यादा खराब

मांडू नगर परिषद होने के बाद यहां के जनप्रतिनिधि आज तक इस और कदम नहीं उठा पाए। कई वर्षों से में किए जाने वाले विकास कार्यों में मुक्तिधाम की सुविधा को प्रमुखता से नहीं लिया जा रहा है। जबकि समय पर यह सभी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि अधिकांश ग्रामीण अंचल में भी मुक्तिधाम हैं। बारिश के दिनों में तो इतना पानी भर जाता है कि अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो जाता है।

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धार के वरिष्ठ पत्रकार हैं|