नीट परीक्षा में ‘नो नीट एंड नो क्लीन सर!’

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नीट परीक्षा में ‘नो नीट एंड नो क्लीन सर!’

राकेश अचल 

भारत में आप चाहे जो कर लें किसी भी क्षेत्र में न नैतिकता का पौधा रोप सकते हैं और न अनैतिकता की फसल पनपने से रोक सकते हैं, क्योंकि अनैतिकता का घुन पूरे सिस्टम को चट कर चुका है. हाल ही में नीट परीक्षा के रद्द होने की कहानी जगजाहिर है.

नीट यानि राष्ट्रीय अहर्ता और प्रवेश परीक्षा अर्थात ‘नीट'(NEET) का अतीत विवादों से भरा रहा है।बेहद काला है. इस परीक्षा में चूंकि नेशनल शब्द बाबस्ता है इसलिए नीट परीक्षा का पेपर लीक होना और परीक्षा रद्द होना राष्ट्रीय शर्म का विषय है.और शर्म से हमारे सिस्टम तथा सरकार का कोई रिश्ता अब शायद बचा नहीं है. शर्म से कोई रिश्ता होता तो ऊपर से लेकर नीचे तक कोई तो इस नाकामी की नैतिक जिम्मेदारी लेता. इस्तीफ़ा देता?

नीट परीक्षा ही नहीं बल्कि हर प्रादेशिक और राष्ट्रीय परीक्षाएं लीकप्रूफ नहीं हैं. हर साल नीट परीक्षा के “पेपर लीक” के आरोप लगे, लेकिन आधिकारिक तौर पर बड़े स्तर पर स्वीकार या जांच वाले मामले बहुत कम हैं।मुझे याद आता है साल 2015. तब एआईपीएमटी का पेपर लीक हुआ था. तब शायद नीट नहीं होती थी.इस परीक्षा का पेपर कथित रूप से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए लीक हुआ। तब सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया। यह भारत के मेडिकल एंट्रेंस इतिहास का सबसे बड़ा पेपर लीक माना जाता है।

वर्ष 2021 में पहली बार सॉल्वर गैंग और नकल नेटवर्क का पता चला था. उस साल कई राज्यों में “सॉल्वर गैंग” पकड़े गए।

यद्यपि पूरे देश में परीक्षा रद्द नहीं की गई थी.लेकिन बिहार, राजस्थान और यूपी में संगठित नकल नेटवर्क सामने आए। बेशर्म सिस्टम ने इसे पूर्ण राष्ट्रीय पेपर लीक आधिकारिक तौर पर नहीं माना गया।

देश में भाजपा सरकार बनने के बाद लगता है कि नीट परीक्षा के पेपर लीक करना एक राष्ट्रीय उद्योग बन गया. साल 2024 में सबसे बड़ा विवाद सामने आया.बिहार और गुजरात से पेपर लीक के आरोप सामने आए.कई गिरफ्तारियां हुईं. सीबीआई जांच हुई. कोई 67 छात्रों के 720/720 अंक आने से विवाद और बढ़ा.

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मजे की बात ये कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कुछ छात्रों को लाभ मिला, लेकिन पूरे सिस्टम में “व्यापक लीक” का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा रद्द नहीं की गई। 2024 मामले में जांच एजेंसियों ने कहा कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कुछ लोगों तक पहुंचा था और “सॉल्वर गैंग” सक्रिय थे।

नीट परीक्षा को नीट एंड क्लीन ‘ बनाने के लिए सरकार फिर भी कुछ नहीं कर सकी. नतीजा सबके सामने है. इस साल 2026 में फिर पेपर लीक के आरोप सामने आए। “गेस पेपर” के नाम पर लाखों रुपये में असली प्रश्नपत्र बेचे जाने की जांच चल रही है और मामला CBI तक पहुंच गया है।

बार-बार लीक 

भारत मे बड़े और राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक करने का धंधा 

वर्ष 2015 से चल रहा है. यानि 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद से.अर्थात बड़े स्तर पर कम से कम 4 प्रमुख विवाद सामने आए हैं।लेकिन छोटे स्तर पर “सॉल्वर गैंग”, नकल और पेपर आउट होने के आरोप लगभग हर 2–3 साल में सामने आते रहे हैं। लाखों परीक्षार्थी इस चोर धंधे की सजा भुगतते हैं लेकिन पिछले एक दशक में न किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया और न लीकेज रुका.

दर असल प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर न केंद्र सरकार सजग है और न राज्य सरकारें. दुर्भाग्य से अभी तक देश के लाखों युवाओं के भविष्य से जुडा ये अपराध अभी तक राजनीतिक मुद्दा बना ही नहीं है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भले ही ‘” नीट के अनीट” होने का मामला संसद में उठाने का भरोसा दिलाते हैं किंतु सडकों पर कोई नहीं आता.जिस देश में सरकार इस पूरे मामले पर मौन साधे बैठी है. प्रधानमंत्री के मन में इस विषय के अंकुर आजतक नहीं फूटे तो कल के नेताओं यानि युवाओं की किस्मत. इसे जोडने में कितना वक्त लगेगा, ये कोई नहीं जानता. यही सच है औरसच कडवा होता ही है.