मानव की कहानी 

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मानव की कहानी 

 

     – एन के त्रिपाठी

मानव के पृथ्वी पर आने की बहुत रोचक कहानी है। विश्व के सभी प्रचलित धर्मों में मानव उत्पत्ति की कहानियाँ बतायी गई हैं। ये सभी धार्मिक अवधारणाएँ 1859 में तब कपोल कल्पित सिद्ध हो गईं जब डार्विन नाम के जीववैज्ञानिक ने अपनी क्रांतिकारी पुस्तक “On the Origin of Species” में प्राकृतिक चयन द्वारा प्रजातियों के विकास का सिद्धान्त प्रतिपादित किया। उसने अनेक जीवों की प्रजातियों का अध्ययन किया तथा घोषणा की कि आज के वनमानुष बंदर जैसे गोरिल्ला और चिम्पांजी इत्यादि तथा मानव के पूर्वज एक ही थे। इससे न केवल विज्ञान वरन साहित्य, दर्शनशास्त्र तथा समाजशास्त्र आदि पर मूलभूत प्रभाव पड़ा।

मानव का सबसे आदि पूर्वज साठ- सत्तर लाख वर्ष पूर्व पृथ्वी पर दो पैरों से चलने लगा। धीरे-धीरे 40 से 20 लाख वर्षों पूर्व वही पूर्वज थोड़ा परिवर्तित होकर ऑस्ट्रेलोपिथेकस ( Australopithecus) के रूप में विकसित हुआ। वह संभवतः प्राकृतिक पत्थरों का हिंसक पशुओं से बचाव तथा शिकार के लिए प्रयोग करने लगा।

प्राकृतिक चयन के द्वारा 25 लाख वर्ष पूर्व से लेकर 18 लाख वर्षों पूर्व के बीच में होमो ( Homo) प्रजातियों का उद्धव होने लगा। प्राचीन होमो का मस्तिष्क छोटा था तथा उसमें कुछ वनमानुष जैसे गुण भी विद्यमान थे।होमो इरेक्टस ने पत्थरों के औज़ार बनाना प्रारंभ कर दिया। यह प्राचीन पाषाण युग था। इसके पश्चात मध्य पाषाण युग में होमो प्रजातियों का कुछ और विकास हुआ। इन्होंने आग का उपयोग करने की कला को सीख लिया था। इनकी कई प्रजातियां थी जिनका जीवशास्त्र और मानवविज्ञान में विस्तृत विवरण दिया गया है। लगभग तीन-चार लाख वर्ष पूर्व होमो सेपियन तथा होमो नीनडरथल के रूप में वर्तमान मानव के समान दो प्रजातियाँ रह गईं। इन्होंने भाषा तथा संस्कृति का विकास किया। इनके मस्तिष्क का आकार बढ़ गया तथा कुछ सोचने की शक्ति आने लगी। वह अनेक भौगोलिक क्षेत्रों में धीरे धीरे फैलने लगा। प्राकृतिक चयन में अंतिम विजेता होमों सेपियन, अर्थात हम लोग रह गए।

केवल 10-12 हज़ार वर्ष पूर्व से नवीन पाषाण युग प्रारम्भ हुआ। होमो सेपियन अर्थात आधुनिक मानव ने कुछ घासों ( अनाजों) के बीजों से कृषि करना सीख लिया। इससे उसके जीवन में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन आया। कृषि से भोजन के भंडारण की उपलब्धता हो जाने से जंगल में प्रतिदिन शिकार का कठिन कार्य बहुत कम हो गया। मनुष्य ने अनेक पशुओं की प्रजातियों को घरेलू बना लिया तथा उनका उपयोग कृषि एवं भोजन के लिए करने लगा। लगभग आठ हज़ार वर्ष पूर्व से ही अनेक धातुओं की खोज भी प्रारंभ हो गई जिससे कृषि और शिल्प को बहुत बढ़ावा मिला। नदियों की चौड़ी घाटियों में मेसोपोटामिया, मिश्र, सिंधु घाटी तथा चीन जैसी सभ्यताएं अलग-अलग स्थानों पर विकसित होने लगी। लगभग चार हज़ार वर्ष पूर्व घोड़ों का उपयोग प्रारंभ होने से मानव की गतिशीलता बहुत बढ़ गई। अनाज की उपलब्धता और घोड़ों ने विशाल सेनाओं को जन्म दिया। प्राचीन विश्व की सभ्यताओं के बीच संपर्क भी होने लगा।

मानव की विकास गाथा में शस्त्रों के आविष्कार से मस्तिष्क का तेज़ी से विकास हुआ है। पत्थरों से लेकर बीसवीं शताब्दी के एटम बम तक शस्त्रों के विकास करने की उत्सुकता ने मानव मस्तिष्क को नई ऊँचाइयाँ दी है। कंप्यूटर का जन्म भी पहले सेना के लिए ही हुआ था। आज तकनीक और विज्ञान से बनी मशीनों एवं उपकरणों ने मानव को थल, जल, नभ और अंतरिक्ष में अद्वितीय बना दिया है। अब मानव मस्तिष्क ने उसको वहाँ पहुँचा दिया है जहाँ उसके द्वारा बनाई गई मशीनें उसी के मस्तिष्क को चुनौती दे रही हैं। मानव के विकास ( या अन्ततोगत्वा विनाश ) की यात्रा निरंतर चल रही है।