
राज- काज: मुसीबत में मुख्यमंत्री से पंगा लेने वाले विधायक….
* दिनेश निगम ‘त्यागी’
मुसीबत में मुख्यमंत्री से पंगा लेने वाले विधायक….

– एक समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पंगा लेने वाले भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी द्वारा लगाए गए आरोप से मुसीबत में हैं। मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि मामला एक महिला के साथ यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। इसे लेकर दिलचस्प आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं। जैसे, विधायक चिंतामणि ने कहा कि लगाए गए आरोप झूठे हैं। इन्हें लेकर मैं आपराधिक और मानहानि का केस दायर करूंगा। इसके साथ उन्होंने कह दिया कि मैं रीना को पवन खेड़ा बनाकर छोड़ूंगा। जवाब देने कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक सामने आए। उन्होंने मामले को अलग मोड़ देते हुए कहा कि रीना महिला हैं और पवन पुरुष, भला चिंतामणि एक महिला को पुरुष कैसे बना सकते हैं? नायक ने कहा कि विधायक को किसी महिला के बारे में ऐसी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने की बजाय आरोपों की जांच का सामना करना चाहिए। रीना का आरोप है कि चिंतामणि ने विक्रम विवि की एक महिला प्रोफेसर का चरित्र हनन कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि मिहला प्रोफेसर को पद से इस्तीफा देना पड़ा। पीड़ित 10 साल से न्याय मांग रही है लेकिन नहीं मिला। सवाल है कि क्या ये आरोप साबूतों पर आधारित है? सबूत हैं तो चिंतामणि वर्ना रीना भी खेड़ा की तरह काेर्ट के चक्कर में उलझ सकती हैं।
* कानून के शिकंजे में कब आएंगे हादसों के जवाबदार….?*

– पर्यटकों की मौज-मस्ती के लिए चलने वाला क्रूज बरगी डेम में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जिंदगियां लील गया। हंसते-खेलते परिवार काल के गाल में समा गए। हालात बताते हैं कि हादसा आपराधिक लापरवाही का नतीजा था। मौसम की चेतावनी के बावजूद क्रूज को बरगी डेग के बीच ले जाया गया। पर्यटकों को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई। आंधी चलने पर चालक से क्रूज को किनारे ले चलने के लिए कहा गया लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी। नतीजा, क्रूज डेम की गोद में समा गया। भला हो उन मजदूरों का, जो पास में काम कर रहे थे, उन्होंने डेम में कूद कर अधिकांश पर्यटकों की जान बचाई वर्ना किसी का भी बचना मुश्किल था। सरकार वही कर रही है जो हमेशा करती है। कुछ लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। मृतकों, घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया जा रहा है। सवाल है कि कोई सरकार लोगों की जिंदगी से ऐसे कैसे खेल सकती है? ऐसा कुछ क्यों नहीं किया जाता ताकि भविष्य में फिर कभी ऐसी लापरवाही न हो? कफ सीरप कांड हो या दूषित पेयजल के कारण मौतों का मामला, आपराधिक कार्रवाई कर जवाबदारों को कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया जाता? हादसे के बाद निलंबन और कुछ समय बाद मलाईदार पोस्टिंग, यह तो लीपापोती हुई।
* विवादित बयान देने के आदी होते जा रहे पीठाधीश्वर….!*

– बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ख्याति विदेशों तक फैल रही है। उनके कार्यक्रमों में लाखों की भीड़ जुटती है। बावजूद इसके वे विवादित बयान क्यों देते हैं, जिससे बार-बार माफी मांगने की नौबत आए, यह समझ से परे है। महाराष्ट्र में वे पहले संत तुकाराम पर बयान देकर फंसे। इसके बाद हर व्यक्ति से चार बच्चे पैदा करने का आह्वान कर डाला । यह भी नहीं सोचा कि महिलाओं की राय क्या है? उनमें ज्यादा बच्चा पैदा करने की क्षमता है भी या नहीं। इसके बाद वीर शिवाजी पर टिप्पणी के कारण उन्हें माफी मांगना पड़ी। अब उन्होंने कह दिया कि बड़े घरों की महिलाएं शराबी होती हैं। इसे लेकर भी सड़कों पर विराेध हो रहा है और धीरेंद्र शास्त्री से माफी की मांग की जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि पीठाधीश्वर विवादित बयान देने के आदी होते जा रहे हैं या चर्चा में बने रहने के लिए वे जानबूझ कर ऐसा करते हैं? वजह जो भी हो लेकिन उनके जैसे व्यक्तित्व के लिए ऐसे विवाद शोभा नहीं देते। उनका कोई भक्त उन्हें माफी मांगते नहीं देखना चाहता। पर बार-बार ऐसा हो रहा है। अच्छा होगा कि कथा वाचक महोदय सोच विचार कर बोलें और ज्यादा बोलने के चक्कर में कुछ भी बोलने से बचें। लोगों के लिए कैंसर अस्पताल की नींव रखने और कन्याओं का विवाह जैसे नेक काम करने वाले व्यक्तित्व के दामन में लोग किसी भी तरह का दाग नहीं देखना चाहते।
* कांग्रेस की फजीहत का कारण बन गए दिग्विजय….!*

– वरिष्ठतम होने के नाते दिग्वजय सिंह को कांग्रेस को मजबूत करने की वजह बनना चाहिए लेकिन अक्सर वे पार्टी को मुसीबत में डाल देते हैं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को ही आड़े हाथ ले लिया। ऐसा लग रहा था , जैसे वे जीतू की तारीफ कर रहे हैं लेकिन सच यह नहीं। संदेश यही गया कि दिग्विजय उनसे नाराज हैं। यही कारण है कि डैमेज कंट्रोल के लिए जीतू को दिग्विजय से मिलने उनके बंगले जाना पड़ा। सवाल है कि आखिर दिग्विजय ने ऐसा मैसेज क्यों दिया कि कांग्रेस के अंदर सब ठीकठाक नहीं है? गुरू-शिष्य के बीच का यह विवाद कांग्रेस का बेड़ा गर्क कर सकता है। दरअसल, दिग्विजय ने पार्टी की एक बैठक में जीतू को खरी-खरी सुनाते हुए कह दिया कि वाल्मीकि समाज और बसोड़ समाज का कोई व्यक्ति प्रदेश कांग्रेस कमेटी में क्यों नहीं है, जबकि जीतू केसी वेणुगोपाल से कुछ भी लिखवाकर ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीतू का कहा कोई टालता नहीं है। कांग्रेस आलाकमान तक जो जीतू की पकड़ है वो हमारी भी नहीं। जीतू ने भी जवाब दिया और कहा कि चेला तो मैं आप ही का हूं। इस पर दिग्विजय ने कहा-मेरे चेले हो लेकिन गुरु रह गया गुड़ और चेला बन गया शक्कर। आप ही बताइए, यह वाकया कांग्रेस की फजीहत कराने वाला है या नहीं?
निगम-मंडलों के बाद अब मंत्रिमंडल की बारी….

– निगम-मंडलों, आयोगों आदि में राजनीतिक नियुक्तियाें के बाद अब प्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल की बारी है। निगम – मंडलों में नियुक्तियों के जरिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और संगठन ने क्षेत्रीय, जातीय और गुटीय संतुलन साधने क कोशिश की है। यह बात अलग है कि केपी यादव को महत्वपूर्ण जवाबदारी देने और कुछ खास समर्थकों को तवज्जो न मिलने के कारण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे में निराशा है। पर ग्वालियर में अशोक शर्मा को लेकर भरपाई की कोिशश की गई है। बहरहाल, निगम-मंडलों में नियुक्तियों के साथ मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। इसमें परफारमेंस न देने और विवादों में रहने वाले मंत्रियों की छुट्टी होगी, जबकि कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए छिंदवाड़ा के आदिवासी नेता कमलेश शाह और भाजपा के कुछ वरिष्ठ विधायकों गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह जैसों को जगह मिल सकती है। खबर है कि मुख्यमंत्री डॉ यादव संगठन के केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के साथ चर्चा कर यह तय कर चुके हैं कि किन चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर करना है और किन विधायकों को अपनी टीम में शामिल करना है। इसके लिए ठीक समय और मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है। कभी भी शपथ ग्रहण समारोह की खबर आ सकती है।
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