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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में प्रदर्शन और आंदोलन

ट्रंप, मोदी व सीटा को लेकर नाराजगी

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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में प्रदर्शन और आंदोलन

Bhopal: मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में 83वीं भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर भारी आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें किसानों और मजदूरों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (सीटा) की प्रतियां आग के हवाले कर सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा आक्रोश जताया।

बीना में किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम और संदीप ठाकुर के नेतृत्व में किसानों ने सभा और रैली कर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। डॉ. सुनीलम ने पंजाब के तीन महीने लम्बे संघर्ष से लैंड पूलिंग नीति रद्द कराने, कर्नाटक के देवनहल्ली के 13 गांवों द्वारा 1200 दिनों के आंदोलन से भूमि अधिग्रहण रोकने तथा लंबी लड़ाई के बाद 3 विवादास्पद किसान विरोधी कानून रद्द कराने की उपलब्धियां गिनाईं। साथ ही सागर के फसल बीमा घोटाले का भी उल्लेख किया, जिसमें 20 वर्षों में 1000 करोड़ फसल बीमा प्रीमियम के बदले मात्र 5 करोड़ मुआवजा दिया गया।

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इंदौर में किसान संघर्ष समिति, अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू, एसएमएस, एटक समेत अन्य ने गांधी हाल से जुलूस निकाला और ट्रंप के पोस्टर जलाकर विरोध जताया। छिंदवाड़ा में ‘अडानी छिंदवाड़ा छोड़ो’ के नारों के साथ गौतम अडानी का पुतला दहन हुआ। रीवा के ऋतुराज पार्क में एसकेएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिवसिंह, प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष गया प्रसाद मिश्र, सीटू यूनियन समेत कई अन्य जन प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों का पुरजोर विरोध किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

ग्वालियर, सिवनी, मुलताई, राजगढ़ और रायसेन जैसे जिलों में भी भारी संख्या में प्रदर्शन हुए, जहां किसान संघर्ष समिति के अनेक पदाधिकारी, किसान नेता और समाजसेवी शामिल हुए। ग्वालियर में किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की अपील की।

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एसकेएम ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी ने किसानों का वादा तोड़ने के साथ-साथ अमेरिका की दबंगई के सामने झुक कर देश की संप्रभुता को खतरे में डाल दिया। उन्होंने 2017 में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन कॉरपोरेट-केंद्रित नीतियों ने कृषि को बर्बाद कर दिया। मनरेगा फंड में कटौती, खाद्य सब्सिडी घटाना, नीतिगत शिथिलता से ग्रामीण और किसान आत्महत्या बढ़ा रहे हैं।

एसकेएम ने प्रधानमंत्री को चेतावनी दी है कि यदि किसानों को लाभकारी मूल्य, मज़दूरों को न्यूनतम मजदूरी, कर्जमुक्ति, कृषि भूमि की कॉरपोरेट लूट पर रोक, चार श्रम संहिताओं का रद्दीकरण और बेरोज़गारी दूर करने की मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे भारत में मजदूर-किसान एकता के साथ उग्र और लंबा आंदोलन होगा।

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*मध्यप्रदेश में प्रमुख नेतृत्व एवं भागीदारी:*  

– डॉ. सुनीलम (राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति)

– संदीप ठाकुर

– एड शिवसिंह (राष्ट्रीय प्रवक्ता, किसान संघर्ष समिति)

– इंद्रजीत सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति)

– गया प्रसाद मिश्र (प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा)

– रामस्वरूप मंत्री (मालवा-निमाड़ संयोजक, किसान संघर्ष समिति)

– अन्य किसानों व मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि

इस जमीनी आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसान-मजदूर का सरकार की कॉरपोरेट समर्थित नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है, जो देश की कृषि व्यवस्था और आर्थिक संप्रभुता दोनों के लिए गंभीर चुनौती हैं।