
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर पिपलिया मंडी मल्हारगढ़ में जनाक्रोश जारी – प्रदर्शन नारेबाजी घेराव करते हुए पुतला दहन किया
मल्हारगढ़ गाडगिल चौराहा पर आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर । जिले भर में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया जाने के खिलाफ आंदोलन तीसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा । आक्रोशित सैकड़ों किसानों ग्रामीणों युवाओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले मुद्दे के साथ प्रदेश भाजपा सरकार की नाकामियों पर भी जमकर ख़िलाफ़त की ओर पुतला दहन किया ।
जिले के पिपलिया मंडी मल्हारगढ में राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में गुरुवार को पिपलिया मल्हारगढ़ में व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला।
किसान नेता श्यामलाल जोकचंद एवं कमलेश पटेल के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में क्षेत्र के किसान, मजदूर, व्यापारी, महिलाएं तथा बड़ी संख्या में आमजन शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने गाडगिल चौराहा पर एकत्रित होकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं चुनाव आयोग का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया इस दौरान पुलिस अधिकारियो व कर्मचारियों के बीच खिंचतान भी हुई ओर पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की । वही लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के समर्थन जताकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान गाडगिल चौराहा पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर आघात बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। सभा के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने गाडगिल चौराहा से एसडीएम कार्यालय तक पैदल रैली निकाली। रैली के दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और तख्तियां लिए हुए थे तथा लोकतंत्र बचाने और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे। एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने घेराव किया और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में एक योग्य, शिक्षित और संघर्षशील महिला नेता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर रखने के लिए राजनीतिक दबाव और प्रभाव का उपयोग किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनवाई करने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने में व्यस्त है। सहकारी संस्थाओं और सोसायटियों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की संस्थाओं पर राजनीतिक कब्जा कर लिया गया है, जिसके कारण किसानों को खाद, बीज एवं अन्य कृषि सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि उपज मंडी चुनाव पिछले लगभग 15 वर्षों से नहीं कराए गए हैं, जिससे किसानों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
कमलेश पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों का भी अपमान है।
मानसिंह चौहान ने ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की उपेक्षा का मुद्दा उठाया तथा सरकार से किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की। रघुवीर सिंह रिछा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती जनभागीदारी और जनसंघर्ष से ही संभव है तथा जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा।
गफ्फार रंगरेज ने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के प्रयास कभी सफल नहीं हो सकते और लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है। मनोहर सोनी एवं महेश गुप्ता ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वर्गों को एकजुट रहने का आह्वान किया।
सभा में दिनेश पाटीदार, कुंजीलाल पाटीदार, अफसर मंसूरी, भगतराम डाबी, श्यामलाल लकुम, कृष्णकांत माली, नागूलाल चौहान, प्रहलाद पाटीदार, वर्षा सांखला, आबिद भाई, डॉ. गोविंद मेघवाल एवं सरफराज मेव सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने राज्यसभा नामांकन निरस्त किए जाने की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संविधान की भावना के विपरीत बताया।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, व्यापारी, युवा एवं महिलाओं की उपस्थिति रही।

गाडगिल चौराहा से एसडीएम कार्यालय तक निकाली गई रैली में प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ, निष्पक्ष चुनाव कराओ तथा किसानों के अधिकारों की रक्षा करो जैसे नारे लगाए।
कार्यक्रम का संचालन दिनेश कारपेंटर ने किया जबकि अंत में इशू धनगर ने आभार व्यक्त किया। विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, राज्यसभा नामांकन निरस्तीकरण मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा किसानों और आमजन के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।





