झोलाछाप डॉक्टर पंहुचा सलाखों के पीछे 1वर्ष का सश्रम का कारावास!

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सिंहस्थ-2004

झोलाछाप डॉक्टर पंहुचा सलाखों के पीछे 1वर्ष का सश्रम का कारावास!

 

Ratlam : वैध डिग्री नहीं होने के बावजूद क्लीनिक पर एलोपैथिक दवाईयों से मरीजों का उपचार करते हुए पाए जाने के मामले में आरोपी डॉ कैलाशचंद को

न्यायालय रोहित शर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जावरा, जिला रतलाम द्वारा 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई तथा 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।

 

प्रकरण की जानकारी देते हुए जिला अभियोजन अधिकारी जीपी घाटिया ने बताया कि12-अप्रेल-17 को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सिविल हॉस्पिटल ने डॉक्टर दिनेश पाटीदार को निर्देश दिए कि झोलाछाप फर्जी डॉक्टरों की जांच करने हेतु जांच दल बनाकर उनके साथ जाए। तब डाक्टर दिनेश पाटीदार तहसीलदार केपी हलवाई, रितुराज सिंह आईएएस, तहसीलदार जावरा को साथ लेकर फर्जी डॉक्टर कैलाशचन्द्र रावल के क्लिनिक पर पंहुचे जहां रावल अपने क्लीनिक पर एलौपेथिक दवाईयों से मरीजों का उपचार करते पाए गए। न ही उनके पास कोई वैध डिग्री पाई गई, दल ने उनके क्लीनिक का पंचनामा बनाकर, दवाईयां क्लीनिक से जप्त कर दवाईयों की सूची बनाई व क्लीनिक सील कर दिया।

 

और फर्जी डॉक्टर के विरूद्ध कार्यवाहीं करने हेतु पुलिस चौकी हाटपिपल्या पर आवेदन दिया था। पुलिस ने आरोपी कैलाश रावल के विरूद्ध अपराध धारा 24 म.प्र.आयुर्वेदिक अधिनियम का प्रकरण दर्ज करते हुए न्यायालय में पेश किया गया।

अभियोजन की और से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी भुपेन्द्र कुमार सांगते द्वारा शासन की और से पैरवी कर न्यायालय में साक्ष्य पेश किए।

 

न्यायालय ने साक्ष्य के आधार पर आरोपी कैलाशचंद पिता मोहनलाल रावल, उम्र 70 साल, निवासी हाटपिपलीया, जावरा जिला रतलाम के विरूद्ध आरोप सिद्ध पाए जाने से धारा 24 म.प्र. आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 में एक वर्ष सश्रम कारावास व 1हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया।