

Regional Journalism : विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता जोखिम भरी!
Mumbai : आज पत्रकारिता दो तरह से की जा रही है। एक वे पत्रकार हैं, जो पत्रकारिता को जी रहे हैं, दूसरे वे जो पत्रकारिता कर रहे हैं। आंचलिक पत्रकार पत्रकारिता को जीते हैं। वे अपनी जान जोखिम में डालकर पत्रकारिता कर रहे हैं। वही सच्ची पत्रकारिता है। यह विचार भोपाल स्थित माधवराव सप्रे संग्रहालय के मुखिया पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने ‘कथा’ व ‘अनभै’ द्वारा प्रेस क्लब में ‘आंचलिक पत्रकारिता’ पर आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए।
वरिष्ठ पत्रकार व दैनिक ‘भास्कर’ के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता पूरा सच दिखाती है। सच को सामने लाने में कभी-कभी आंचलिक पत्रकार की जान भी चली जाती है। वे सच के पहरेदार हैं, पर आज जरूरत उनके संगठित होने की है।
कथाकार ,पत्रकार व ‘कथा’ के अध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा कि आज भी मेरे मन और प्राण आंचलिक पत्रकारिता में बसते हैं। मेरी मान्यता है कि राष्ट्रीय अखबारों को खाद-पानी आंचलिक अखबार ही देते हैं। देश की वे बड़ी खबरें जिन पर हंगामा हुआ, सरकारें हिलीं, न्यायिक जांच आयोग बने उनका मूलाधार आंचलिक अखबार ही थे। ‘अनभै’ के संपादक डॉ हूबनाथ पांडेय ने कहा कि जब मैं बेस्ट में मजदूरी करता था तब हम मजदूरों को शिक्षित करने का काम दो छोटे अखबार ही करते थे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष नवनीत’ के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि सच को सच, गलत को गलत कहने की ताकत होना चाहिए और यह ताकत उन अखबारों में हैं जिन्हें हम आंचलिक कहते हैं। वे हिम्मत दिखाते हैं और वह लड़ाई लड़ते हैं जो जीतने के लिए लड़ी जाती है। स्वागत भाषण व आभार विवेक अग्रवाल व संचालन वरिष्ठ पत्रकार,संपादक द्विजेन्द्र तिवारी ने किया।
इस अवसर पर डॉ वंदना शर्मा, डॉ रीता दास राम, अभय मिश्रा, ओमप्रकाश तिवारी, विमल मिश्र, विवेक तिवारी, जनार्दन पांडेय, राजेश झा, सुषमा गुप्ता, अजय बिहारी, राजेश विक्रांत, जाहिद अली, पद्मा कर्वे, अनिल गलगली, डॉ दिनेश पाठक, शशि झा सहित पत्रकारिता से जुड़े तमाम छात्र व छात्राएं उपस्थित थे।