जिला अस्पताल परिसर में हंगामा साठिया समुदाय के दो गुटों में संघर्ष ओर जमकर पथराव

पुलिस ने 40 पर केस दर्ज कर 3 को जेल भेजा

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जिला अस्पताल परिसर में हंगामा साठिया समुदाय के दो गुटों में संघर्ष ओर जमकर पथराव

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट 

मंदसौर । जिला चिकित्सालय में अचानक हंगामा हो गया जब साठिया समुदाय के लोगों ने आपस में मारपीट करने ओर आपस में पथराव करने से अन्य लोगों मरीजों को समस्या हो गई । एक पक्ष ने समाज की युवती को जहर खिलाने तो दूसरे पक्ष ने मारपीट का आरोप लगाया इस घटनाक्रम में पुलिस ने बलपूर्वक सभी को भगाया और मामला दर्ज़ कर कार्यवाही करते हुए 3 लोगों को जेल भेज दिया ।

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शहर के साठिया समुदाय के दो गुटों के बीच सुबह बवाल को लेकर जमकर संघर्ष हुआ। विवाद में घायल हुए लोग जब इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, तो वहां भी दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए और परिसर में ही पथराव शुरू कर दिया। इससे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। मरीज जान बचाकर भागे।

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। सिटी कोतवाली पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस कायमी करते हुए कुल 40 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। वहीं तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

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एसडीएम कार्यालय से शुरू हुआ था विवाद – कोतवाली थाना प्रभारी पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि विवाद की शुरुआत सोमवार को एसडीएम से फीस निकलवाने के दौरान एक युवक और युवती के बीच हुई कहासुनी से हुई थी। दूसरे दिन सुबह यह विवाद बढ़ गया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। इसके बाद घायल पक्ष जब जिला अस्पताल पहुंचा, तो वहां एक गुट ने दूसरे पक्ष पर अपनी युवती को जबरन जहर खिलाने का गंभीर आरोप लगाया। इसी दौरान दोनों पक्षों की महिलाएं और पुरुष अस्पताल परिसर में ही भिड़ गए। एक-दूसरे पर पत्थर फेंके गए। पुलिस ने दोनों पक्षों को रिपोर्ट पर बताया, मारपीट, पथराव और जबरन जहरीला पदार्थ खिलाने की धाराओं में केस दर्ज किया है।

घायलों ओर जहरीले पदार्थ खाने से युवती का इलाज़ हॉस्पिटल में जारी है ।

मौके पर एसडीएम ग्रामीण शुभम पाटीदार भी पहुंचे और आवश्यक निर्देश दिए । श्री पाटीदार ने बताया कि शांति है और पीड़ित महिला का इलाज चल रहा है ।

पुलिस ने विभिन्न धाराओं में अस्पताल में उपचार करने पर चिकित्सा एवं चिकित्सक सुरक्षा अधिनियम व लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत अलग से सख्त केस दर्ज किया गया है।