व्यंग: लड़की की रज़ामंदी का इंतज़ार किए बिना ये कारनामा कर बैठे प्रोफेसर साहब

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व्यंग: लड़की की रज़ामंदी का इंतज़ार किए बिना ये कारनामा कर बैठे प्रोफेसर साहब

मुकेश नेमा 

लखनऊ यूनिवर्सिटी मे पढ़ाने वाले एक प्रोफेसर साहब आजकल रुसवा किये जा रहे है। लोग इतनी सी बात का बुरा मान रहे है कि उन्होंने अपनी एक स्टुडेंट जिसे वो अपनी तरफ से प्रेमिका करार दे चुके थे , को कॉल किया। उसे परीक्षा मे आने वाले पेपर को बस उसके लिए आऊट करने की खबर दी।

खबर इस उम्मीद से दी गई थी कि वो सुकन्या अहसान मंद होकर दिखाएगी। पर अफसोस ऐसा हो नही सका और अब हर ऐरा गैरा प्रोफेसर साहब के मजे ले रहा है।

अब यह तो मत ही कहिए कि प्रोफेसर से जहीन और अकलमंद होने की उम्मीद की जाती है। यकीनन वो जहीन होंगे,दुनिया के तमाम दूसरे अकलमंदो की तरह अपनी बीबी से डरते भी होंगे,मेरे ख़याल से वो ये कारनामा बस इसलिए कर बैठे है क्योंकि आशिक़ी वो धूल है जो ज्यों ही आँखों में पड़ती है तब हर अच्छा भला आदमी अकल से अंधा हो जाता है।

प्रोफेसर साहब के इस किए धरे से चेतन आनंद याद आए मुझे। चेतन आनंद अपनी प्रेमिका प्रिया राजवंश को लेकर तब तक फिल्में बनाते रहे जब तक वो दिवालिया नही हो गए। ग़ौरतलब बात यह कि दडबे मे बंद मुर्गियाँ भी प्रिया राजवंश से एक्टिंग कर सकती थी। मजे की बात यह कि ये बात चेतन आनंद को छोड़ सारी दुनिया को पता थी। जब चेतन आनंद जैसा जीनियस यह बात नहीं समझ सका तो प्रोफेसर साहब से इसकी उम्मीद करना बेकार है।

हाय हाय करने वालो से बस इतनी सी गुज़ारिश है मेरी कि ठंडा पी कर सोचें इस नाज़ुक मुद्दे पर। मामला प्रेमिका का है।

भगवान क़सम खाकर बताइए,यदि आप इस मटुकनाथ की जगह होते तो क्या करते ? आप वही तो करेंगे जो आपकी हद मे हो , रांझा ने हीर के लिए भैंसे चराना शुरू कर दिया था। बताइए गायें हाँकता प्रोफेसर आपको अच्छा लगेगा ? वह इकलौता रिश्ता है जिसमें प्रेम शामिल है। ऐसे मे इस भलेमानस ने भी वही किया जो कोई और प्रोफेसर करता ऐसे मे उसके साथ ऐसी बदतमीज़ी की जाना ठीक नहीं।

फिर यह भी तो सोचिए ,बात प्रेमिका की है। दोस्त के अलावा प्रेमिका ही वो रिश्ता है जिसे चुना जा सकता है। अपने तमाम रिश्तेदारों की फ़ेहरिस्त बना कर देख लें। उनमें से ऐसा कौन है जिसकी संगत आपको पसंद है ? ऐसा कौन है जिसे देखकर मन खुश हो जाता है आपका ? ऐसा कौन है जिसके आते ही चिलचिलाती गर्मियों मे सावन के झूले पड़ जाते हैं ? इन सवालों पर गौर कीजिए,इसके बाद भी आपको ये इंसान खतावार लगे तो मुझे अलग से बताइएगा।

और फिर ऐसा भी नहीं कि प्रोफ़ेसर साहब यह कारनामा करने के पहले इसके नतीजे से वाक़िफ़ नहीं होंगे ? खूब होंगे , जानते होंगे की सारा ज़माना ,ख़ासकर ऐसे दब्बू लोग उनके पीछे पड़ जाएँगे जो अपनी प्रेमिका के लिये कुछ करने की चाह मन मे रखने के बावजूद कुछ करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। ऐसे बहादुर आदमी को वीर चक्र से नवाजे जाने के बजाए उसकी लानत मानत करना किसी भी शरीफ़ आदमी को शोभा नहीं देता।

इतिहास,पुराण ,कथा कहानियाँ गप्पें सब इस बात के गवाह है कि इंसान तभी ख़ुदकुशी की हद तक बहादुरी दिखाता है जब कोई खूबसूरत लड़की उसकी जिदंगी मे हो। रांझाँ ,मजनूँ,पुन्नु महिवाल से लेकर इन ताजे ताजे प्रोफ़ेसर साहब तक ,ये सभी इतिहास मे केवल इसलिए अपना नाम दर्ज करवा सके क्योंकि बतौर प्रेरणा एक लड़की इनके आसपास मौजूद थी। इंसान जो काम अपनी प्रेमिका के लिए कर जाता है वो बीबी को छोड़िये,अपनी सगी अम्मा के लिए भी नही करता। ताजमहल बनवाने वाले शाहजहाँ को छोड़ दे तो तारीख़ मे अब तक कोई ऐसा शख्स पैदा ही नहीं हुआ है जिसने अपनी बीबी के लिए कोई बड़ा कहने सुनने लायक़ कारनामा किया हो।

इस पूरे मामले मे लोचा बस इतना सा ही है कि प्रोफेसर साहब उस लड़की को अपनी तरफ से प्रेमिका मान बैठे थे। बेसब्रे थे ऐसे में लड़की की रज़ामंदी का इंतज़ार किए बिना ये कारनामा कर बैठे। इकतरफा इश्क करने वाले इंसान भी अच्छे ही होते है। ऐसे मे मुझे लगता है कि ये प्रोफेसर साहब इस जगहँसाई के बजाय हमारे दिलासे के हक़दार है।