आम जनता को हर परेशानी से बचाना भी देशभक्ति है !

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आम जनता को हर परेशानी से बचाना भी देशभक्ति है !

अन्ना दुराई

अभी और गुंजाइश बाकी है। बहुत कुछ किया जा सकता है। करने के बाद उसे जायज ठहराने के तर्क भी मौजूद हैं। देश में चल रहे संकट के दौर में प्रधानमंत्रीजी आप आपातकाल की घोषणा भी कर सकते हैं। इस कदम को सही ठहराने के लिए भाजपा सरकार और उनके सहयोगियों के पास जवाब भी तैयार है। कह सकते हैं, कांग्रेस ने भी पूर्व में इमरजेंसी लगाई थी। हालाँकि कांग्रेस इसके लिए माफी भी मांग चुकी है। कहने से तात्पर्य है कि आजकल सरकार अपने हर अच्छे बूरे फैसलों को हितकारी साबित करने के लिए पिछली सरकारों के निर्णयों को सहारे के रूप में इस्तेमाल करती है जो कहीं से कहीं तक उचित प्रतीत नहीं होता। यदि किसी ने गलत किया है तो आप उसका उदाहरण देकर गलती नहीं कर सकते। हम जिन बातों के लिए दूसरों की बुराई करते हैं यदि वो ही काम हम खुद करें तो कहां की समझदारी है। यहां बात भाजपा, कांग्रेस या अन्य किसी राजनीतिक दल की नहीं है। जिन भी राज्यों में जिस भी दल की सरकारें हैं, उन्हें अपने अच्छे और जनहितकारी कार्यों से नई राह बनाना चाहिए। न कि एक दूसरे के गलत कामों को स्वयं करके, उसका सर्टिफिकेट हासिल करने के प्रयास होना चाहिए। कांग्रेस ने गलत किया तो भाजपा भी करे या भाजपा ने गलत किया तो कांग्रेस भी करे, इस सोच को बदलना होगा। बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध ले। सरकार को अपनी कमियाँ छुपाने के लिए अन्य राजनीतिक दलों पर ठीकरा फोड़ने की बजाय अपने नेक कामों से जनता का भला करना चाहिए। सरकार के अपने हर फैसले को मास्टर स्ट्रोक बताने की कवायद देश को पतन की ओर ही ढकेल रही है।

 

जहां तक वर्तमान में प्रधानमंत्रीजी की आम जनता से त्याग की अपील है। वो तब व्यापक स्वरूप में सही ठहराई जा सकती है जब शासन प्रशासन के स्तर पर भी त्याग के ठोस उदाहरण प्रस्तुत किए जाएं। यदि आम जनता से कुछ त्याग करने की अपील देशभक्ति है तो प्रधानमंत्रीजी फिर अपने अपने कर्तव्यों से विमुख हो रहे शासन प्रशासन को सचेत करना भी देशभक्ति ही कहलाएगी। सरकारी पैसे के दुरुपयोग और फिजूलखर्ची को भी सख्ती से रोकना होगा। अपने रुपये को चवन्नी की बजाय सवा रुपये में चलाना होगा।

ऐसे समय जब देशभक्ति के मायनों का दायरा विस्तृत और व्यापक हो रहा हो, तो स्वीकारना होगा आम जनता को भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी से बचाना और सुशासन से सरकारी महकमे को पारदर्शिता से चलाना भी देशभक्ति है। हर हाथ को काम देना देशभक्ति है। महंगाई को काबू में रखना भी देशभक्ति है। सभी को रोटी, कपड़ा और मकान उपलब्ध कराना देशभक्ति है। सशक्त समाज और देश के निर्माण के लिये समान दृष्टि से बेहतर आधारभूत संरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना भी सर्वोच्च देशभक्ति ही होगी।