SC-ST, OBC महासम्मेलन : पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के बिगड़े बोल, चर्चित कथावाचकों पर महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल करने का आरोप!

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पूर्व विधायक और बुंदेलखंड जन जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरडी प्रजापति ने देश के चर्चित कथावाचकों पर महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने पंडित धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्ध आचार्य की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि यह विधवा महिलाओं को खाली प्लॉट कहते हैं। ये धर्म की आड़ में महिलाओं का अपमान कर रहे हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई के लिए आगे नहीं आ रहा है।मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय, आरक्षण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा सामाजिक-राजनीतिक टकराव सामने आ गया है। रविवार को राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर महासम्मेलन और प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह आयोजन अपाक्स (APACS) के बैनर तले हुआ, जिसमें प्रदेशभर से कर्मचारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। महासम्मेलन का मुख्य मुद्दा IAS अधिकारी संतोष वर्मा के समर्थन का रहा। आंदोलनकारियों ने संतोष वर्मा पर की गई कार्रवाई को तुरंत वापस लेने की मांग की। संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि संतोष वर्मा पर कार्रवाई दबाव में और एकतरफा तरीके से की गई है। उनका कहना है कि यह दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग की आवाज दबाने का प्रयास है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

महासम्मेलन के दौरान छतरपुर जिले की चंदला विधानसभा से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने मंच से कथावाचकों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी की।प्रजापति ने कहा कि अब बहन-बेटियां तो प्लॉट हो गई हैं। कोई भी सौ बार रजिस्ट्री कराओ, हजार बार रजिस्ट्री कराओ। बहन-बेटियों की छाती से पृथ्वी हिलने लगी है, ये अनिरुद्धाचार्य कहते हैं।एक अंधाचार्य है, वह कहता है कि वाइफ मतलब वंडरफुल इंस्ट्रूमेंट फॉर एंजॉय। तुम भी अपनी एंजॉय वाली मां से पैदा हुए हो का? तभी तुम्हारी आंखें खराब हो गईं, अंधरा।एक बाबा लाली लगाकर कहता है, 25 साल की लड़कियां कथाओं में जाकर अपनी जवानी ‘उतार कर’ आती हैं। मैं चाहता हूं कि हमको फांसी दी जाए, संतोष वर्मा जी को आईएएस से हटा दिया जाए, लेकिन पहले उनको (कथावाचकों को) जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाए, जो व्यास पीठ से ऐसा बोलते हैं।

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संतोष वर्मा प्रकरण से बदले सामाजिक समीकरण
गौरतलब है कि IAS संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की एक बच्ची को लेकर दिए गए बयान के बाद सवर्ण समाज के संगठनों ने कड़ा विरोध किया था। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई। अब इस पूरे मामले में तस्वीर बदलती नजर आ रही है। सवर्ण संगठनों के विरोध के उलट अब एससी-एसटी-ओबीसी संगठनों ने संतोष वर्मा के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है

महासम्मेलन को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि प्रदेश में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक नियुक्तियों में लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। हजारों पद वर्षों से खाली हैं, पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा है और संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित हैं। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आरक्षण से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता की लड़ाई है।