
सम्राट विक्रमादित्य विवि प्रशासन का चौंकाने वाला खुलासा- ‘अल्लाह वाला’ प्रश्न पूछने वाला पेपर सेटर मुस्लिम नहीं था !
कीर्ति राणा की विशेष रिपोर्ट
उज्जैन: सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में गत अप्रैल में हुई हिंदी फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा में एक प्रश्न को लेकर हुए विवाद में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस पेपर सेटर ने वह प्रश्न पूछा था वह हिंदू था, मुस्लिम नहीं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के वरिष्ठतम अधिकारी ने पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा आप की जानकारी के लिये बता दूं जिसने पेपर सेट किया था वह प्रोफेसर मुस्लिम नहीं, हिंदू था।
क्या वह सम्राट विक्रमादित्य विवि से संबंद्ध किसी कॉलेज का प्रोफेसर है? उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना था वह हमारे विवि से सम्बद्ध किसी कॉलेज के प्रोफेसर नहीं हैं। जांच में सामने आया है कि वे प्रोफेसर देवी अहिल्या विवि इंदौर से सम्बद्ध एक शासकीय कॉलेज में पदस्थ हैं।
आप ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की? उनका जवाब था नियमों के तहत हमने उन्हें हमेशा के लिये ब्लेक लिस्ट कर दिया है। पेपर सेटर के रूप में विवि उनकी सेवाएं नहीं लेगा। रहा उनका नाम घोषित करने का प्रश्न तो हमे ब्लेक लिस्ट करने का अधिकार है। इससे आगे की कार्रवाई हम नहीं कर सकते।
गौरतलब है सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय द्वारा दो माह पूर्व आयोजित परीक्षा के दौरान फाउंडेशन कोर्स परीक्षा में दो मामलों में से एक इस विवादित प्रश्न के कारण तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। विरोध करने वाले संगठनों के छात्र नेताओं से विवि प्रशासन की चर्चा के बाद स्थिति सामान्य हुई थी।
*यह मामला था विवादित सवाल वाला*
बीकॉम, बीबीए और बीसीए तृतीय वर्ष के हिंदी फाउंडेशन कोर्स की अप्रैल में हुई परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया था – “अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं”। इसके साथ 4 विकल्प भी दिए गए थे, जिसे लेकर हिंदू संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी पेपर सेटर को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और मूल्यांकन प्रक्रिया से हटा दिया गया । विद्यार्थियों को राहत देते हुए उक्त विवादित प्रश्न के एवज में सभी छात्रों को एक बोनस अंक देने की घोषणा की गई ।
*दूसरा विवाद पेपर निरस्ती की सूचना वाला*
बीए फाइनल ईयर की मई में हुई समाजशास्त्र परीक्षा को यूनिवर्सिटी ने स्थगित कर दिया था और इसकी जानकारी कॉलेजों को वाट्सएप के जरिए दे भी दी थी । लेकिन आगर-मालवा के शासकीय नेहरू कॉलेज प्रबंधन द्वारा वाट्सएप मैसेज को समय पर न देखने के कारण पूर्व निर्धारित टाइम-टेबल पर 25 मई को परीक्षा आयोजित करवा दी गई इसके बाद कॉलेज ने उत्तर पुस्तिकाएं भी मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय भेज दीं ।
इस बड़ी लापरवाही पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने बाकी बचे कॉलेजों में दूसरा प्रश्न पत्र भेजकर परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। इस कारण आगर-मालवा कॉलेज के छात्रों के सामने दोबारा परीक्षा देने का संकट खड़ा हो गया।





