Silver Screen: जो सही हकदार, उसे मिला इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार!

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Silver Screen: जो सही हकदार, उसे मिला इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार!

– हेमंत पाल

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार एक तरह से कलाकार, फिल्मकार और फिल्म निर्माण से जुड़े तकनीशियनों की प्रतिभा का मापदंड तय करते हैं। जब भी किसी  फिल्म, कलाकार या किसी तकनीशियन को ये पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की जाती है, तो उसकी टोपी में एक चमकता हुआ नया पंख लग जाता है। उसके काम को अलग ढंग से आंकलित जाने लगता है। जबकि, फिल्म इंडस्ट्रीज में अवार्डों की कमी नहीं है। फिर भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार इसमें सबसे ऊपर की पायदान पर हैं, क्योंकि ये क़ाबलियत का राष्ट्रीय सम्मान है। दर्शकों को भी संतुष्टि होती है, कि ये पुरस्कार वास्तव में उन्हें दिए गए, जो इस काबिल हैं। इस बार के फिल्म पुरस्कारों की दर्शकों के साथ फिल्म की बारीकियां समझने वालों ने तारीफ की और कहा कि ये वास्तव में सही कलाकारों और फिल्मकारों को दिए गए। जबकि, हर बार ऐसा नहीं हुआ! किसी कलाकार या फिल्म को लेकर आलोचना का झंडा उठाने में देर नहीं जाती। इस बार भी झंडा तो उठा, पर ये उन प्रतिद्वंदियों के हाथ में था जो खुद के लिए उम्मीद लगाए बैठे थे।

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अल्लू अर्जुन को इस बार ‘पुष्पा’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इसका सबसे ज्यादा दर्द अनुपम खेर को हुआ और उनका क्रंदन सुनाई दिया। इसलिए कि उन्हें उम्मीद थी कि इस बार ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए ये अवॉर्ड उन्हें ही मिलना है। उन्होंने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर करके कमेंट भी किया, जिससे लगता है कि वे किस तरह की उम्मीद लगाकर बैठे थे। अनुपम ने टिप्पणी की, कि एक एक्टर ही नहीं बल्कि फिल्म के एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर भी मैं इस फिल्म को मिली मान्यता से खुश हूं। तब और खुशी होती, अगर मुझे मेरी एक्टिंग के लिए भी अवार्ड मिलता। पर, अगर सारी ख्वाहिशें पूरी हो जाएं तो आगे काम करने का मजा और उत्साह कैसे आएगा। चलिए अगली बार।

कुछ ऐसी स्थिति अल्लू अर्जुन को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिलने पर ‘उधम सिंह’ डायरेक्टर शूजित सरकार की भी नजर आई। उनकी बातों से लगा कि वे अल्लू अर्जुन को चुने जाने से खुश नहीं हुए। जबकि, उनकी फिल्म को पांच अवार्ड से नवाजा गया। बेस्ट हिंदी फिल्म के अवॉर्ड सहित कई कैटेगरी में अवार्ड मिले। शूजित सरकार को भरोसा था कि उनकी फिल्म के लिए विक्की कौशल को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिलेगा, पर ऐसा नहीं हुआ। उनका कहना था कि इस बात में कोई दो राय नहीं कि विक्की कौशल बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड डिजर्व करता था। जिस तरह से उसने सरदार उधम के लिए अपने आपको बदला, वह काबिले तारीफ है। हमने जलियांवाला बाग सीक्वेंस से शुरुआत की थी। पहले शॉट वो था, जहां उधम डेड बॉडीज को उठा रहा है, उसके चेहरे को देखकर समझा जा सकता है कि वह उनका दर्द फील कर रहा था। उस सीन के बाद विक्की कई रातों तक सो नहीं सका था।

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इस बार के घोषित पुरस्कारों में गौर करने वाली बात ये रही कि जिन हिंदी फिल्मों और कलाकारों को पुरस्कृत किया गया, वे सभी फ़िल्में व्यावसायिक रूप से भी सफल रही। इस बार 28 भाषाओं की 280 फीचर फिल्मों के लिए आवेदन मिले थे। पुष्पा : द राइस, गंगूबाई काठियावाड़ी, द कश्मीर फाइल्स और ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ की लोकप्रियता जगजाहिर रही। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अल्लू अर्जुन को ‘पुष्पा : द राइस’ के दिया गया। वे यह सम्मान पाने वाले तेलुगु फिल्मों के पहले अभिनेता हैं। फिल्म की सफलता के साथ अल्लू अर्जुन की अदाकारी को भी सराहा गया, जिस पर इस पुरस्कार ने मुहर लगा दी।

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‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की अभिनेत्री आलिया भट्ट के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्मों को मिलने वाला यह 7वां राष्ट्रीय पुरस्कार है। इससे पहले उन्हें 2002 में ‘देवदास’ के लिए अवॉर्ड मिला था। फिर 2005 में ‘ब्लैक’ को हिंदी में बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला। 2014 में ‘मैरी कॉम’ के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। 2015 में भी उन्होंने एक राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था। भंसाली को पांचवा अवॉर्ड 2018 में ‘बाजीराव मस्तानी’ के लिए बतौर बेस्ट डायरेक्टर का मिला तो ‘पद्मावत’ के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड जीता। संजय लीला की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने तो इस बार कमाई और दर्शकों की पसंद में सच में धूम मचा दी। ये कोरोना काल के बाद दर्शकों को सिनेमाघरों में खींचकर लाने वाली पहली फिल्म थी। ग्लैमरस हीरोइन के रूप में पहचानी जाने वाली आलिया भट्ट को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए चुना गया। इस श्रेणी के पुरस्कार को कृति सेनन के साथ साझा किया गया। उन्हें ‘मिमी’ के लिए इस सम्मान से नवाजा गया, जिन्होंने सरोगेट मदर के किरदार में जान डाल दी।

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हिंदी फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत ज्यादा कामयाब नहीं रही, पर इस बायोपिक को पसंद करने वालों की संख्या कम नहीं रही। ये फिल्म ‘इसरो’ के पूर्व वैज्ञानिक और एयरोस्पेस इंजीनियर नंबी नारायणन के जीवन पर आधारित है। उन पर एक साजिश के तहत जासूसी के झूठे आरोप लगे थे। व्यावसायिक सफलता के झंडे गाड़ने वाली फिल्म विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ को नरगिस दत्त अवॉर्ड के तहत राष्ट्रीय एकता की सर्वश्रेष्ठ फिल्म कैटेगरी में चुना गया। इस फिल्म की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन कई मामलों में फिल्म की श्रेष्ठता को चुनौती नहीं दी जा सकती। पंकज त्रिपाठी को ‘मिमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार और पल्लवी जोशी को ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया।

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मुंबई के कमाठीपुरा की ताकतवर वैश्या गंगूबाई के जीवन पर बनी फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ को पांच श्रेणियों में पुरस्कृत किया। आलिया भट्ट को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, उत्कर्षिनी वशिष्ठ को सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले लेखक और फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार भी जीता। वशिष्ठ तथा प्रकाश कपाड़िया ने फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक और प्रीतिशील सिंह डिसूजा ने सर्वश्रेष्ठ मेकअप कलाकार का पुरस्कार भी जीता। ‘आरआरआर’ ने इस बार 6 पुरस्कार जीते। इस फिल्म के संगीत निर्देशक एमएम कीरावानी ने ‘पुष्पा’ के संगीत निर्देशक देवी प्रसाद के साथ सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार साझा किया। दर्शकों का मनोरंजन करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म ‘काला भैरव’ को श्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक, सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफेक्ट्स, सर्वश्रेष्ठ एक्शन निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का पुरस्कार जीता। शूजीत सरकार की बायोपिक ‘सरदार उधम सिंह’ ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के साथ ही सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी, सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिज़ाइन और कॉस्ट्यूम डिजाइन का पुरस्कार जीता।

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डायरेक्टर सृष्टि लखेरा की फिल्म ‘एक था गांव’ को बेस्ट नॉन फीचर फिल्म चुना गया। फिल्ममेकर नेमिल शाह की गुजराती फिल्म ‘दाल भात’ को बेस्ट शॉर्ट फिल्म (फिक्शन) चुना गया है। सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मराठी फिल्म ‘गोदावरी’ के लिए निखिल महाजन को दिया गया। जबकि, श्रेया घोषाल को ‘इराविन निझाल’ के गीत ‘मायावा छायावा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार मिला। ओरिजिनल स्क्रीनप्ले का पुरस्कार मलयालम फिल्म ‘नायट्टू’ और उसके लेखक शाही कबीर को दिया। मलयालम फिल्म ‘मेप्पदियां’ के निर्देशक को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार मिला। सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार असमी फिल्म ‘अनुनाद-द रेजोनेंस’ को दिया गया। सरसरी तौर पर देखा जाए कि तो इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार राजनीतिक दखल से भी परे ही कहे जाएंगे। क्योंकि, किसी ऐसे कलाकार या डायरेक्टर को पुरस्कार से नहीं नवाजा गया जो राजनीतिक चारण प्रवृत्ति के लिए जाने जाते हैं।

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हेमंत पाल

चार दशक से हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हेमंत पाल ने देश के सभी प्रतिष्ठित अख़बारों और पत्रिकाओं में कई विषयों पर अपनी लेखनी चलाई। लेकिन, राजनीति और फिल्म पर लेखन उनके प्रिय विषय हैं। दो दशक से ज्यादा समय तक 'नईदुनिया' में पत्रकारिता की, लम्बे समय तक 'चुनाव डेस्क' के प्रभारी रहे। वे 'जनसत्ता' (मुंबई) में भी रहे और सभी संस्करणों के लिए फिल्म/टीवी पेज के प्रभारी के रूप में काम किया। फ़िलहाल 'सुबह सवेरे' इंदौर संस्करण के स्थानीय संपादक हैं।

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