प्राचार्य को हटाने की मांग को लेकर आम्बुआ के एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्र सड़क पर उतरे: कलेक्टर से मिलने के लिए अलीराजपुर पैदल निकले

113

प्राचार्य को हटाने की मांग को लेकर आम्बुआ के एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्र सड़क पर उतरे: कलेक्टर से मिलने के लिए अलीराजपुर पैदल निकले

Alirajpur: मध्य प्रदेश के पश्चिम सीमांत जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के आम्बुआ स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में व्यवस्थाओं को लेकर बुधवार को विद्यार्थियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। सुबह विद्यालय के छात्र-छात्राएं प्राचार्य की कार्यप्रणाली के विरोध में नारेबाजी करते हुए आम्बुआ से अलीराजपुर कलेक्टर कार्यालय की ओर पैदल ही निकल पड़े। छात्र प्राचार्य को हटाने और विद्यालय की व्यवस्थाओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। रास्ते में एसडीएम तपिश पांडे और तहसीलदार ने विद्यार्थियों को रोककर समझाइश दी, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग रहे।

● भोजन और छात्रावास व्यवस्थाओं पर गंभीर आरोप

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि छात्रावास में दिए जा रहे अनाज में कीड़े निकलते हैं और दूध में पानी मिलाकर दिया जाता है। छात्रों का कहना है कि उन्हें समय पर कॉस्मेटिक सामग्री, जूते और स्वेटर जैसी आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जबकि शासन द्वारा प्रतिवर्ष विद्यालय के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत होता है। विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि यदि बजट पर्याप्त है तो मूलभूत सुविधाओं में कमी क्यों है और राशि का उपयोग किस मद में हो रहा है।

● कलेक्टर से सीधी शिकायत की तैयारी

एकलव्य कन्या परिसर आम्बुआ की छात्राएं भी प्रदर्शन में शामिल रहीं और प्राचार्य के खिलाफ नारे लगाते हुए सीधे कलेक्टर से शिकायत करने की बात कहती रहीं। विद्यार्थियों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को जिला प्रशासन के सामने रखकर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

 

● प्रशासनिक ढांचे और जवाबदेही पर प्रश्न

आलीराजपुर जिले में शिक्षा व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि योजनाएं कागजों पर प्रभावी दिखती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी और क्रियान्वयन में कमी रह जाती है। एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना कमजोर पड़ना भी एक कारण माना जा रहा है। यदि समय-समय पर निष्पक्ष मूल्यांकन और कड़ी मॉनिटरिंग न हो तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।

 

● केंद्रीय नियंत्रण के बाद बढ़ी जटिलता

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि जब से एकलव्य विद्यालय केंद्रीय शासन के अधीन गए हैं, तब से प्रशासनिक अधिकारों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है। बताया जा रहा है कि जिला कलेक्टर को सीधे तौर पर प्राचार्य को हटाने का अधिकार नहीं है। पूर्व में उमराली एकलव्य विद्यालय के मामले में भी जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद ही कार्रवाई संभव हो सकी थी। ऐसे में केंद्रीय अधीनता वाले विद्यालयों में शिकायत निवारण और अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए।

 

● अलीराजपुर और झाबुआ में बढ़ती प्रवृत्ति

हाल के समय में अलीराजपुर और झाबुआ जिलों में वार्डन, प्राचार्य या अन्य व्यवस्थाओं के खिलाफ विद्यार्थियों के सड़क पर उतरने की घटनाएं बढ़ी हैं। छात्र सीधे विरोध प्रदर्शन कर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का रास्ता चुन रहे हैं। यह संकेत देता है कि संस्थागत स्तर पर संवाद तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

 

● बच्चों के आक्रोश के पीछे संभावित अन्य कारण

एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कई बार विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ वास्तविक असंतोष बच्चों से अधिक कुछ अन्य कर्मचारियों या बाहरी तत्वों में होता है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को आगे कर विरोध को स्वर देने की कोशिश की जाती है। यदि ऐसा है तो यह और भी गंभीर विषय है, क्योंकि बच्चों को किसी व्यक्तिगत या प्रशासनिक द्वेष का माध्यम बनाना शिक्षा के वातावरण के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

फिलहाल पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि व्यवस्थाओं में खामियां पाई जाती हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार से विद्यार्थियों को उकसाया गया है तो उसकी भी जांच आवश्यक है। शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बहाल करना ही इस विवाद का स्थायी समाधान माना जा रहा है।