

रविवारीय गपशप :नए जिले के टीथिंग ट्रबल और मैहर का संग्रहालय!
आनंद कुमार शर्मा
इसमें कोई शक नहीं कि नए बनने वाले जिलों के पीछे लाभहानि के बहुत से पैरामीटर हुआ करते हैं , जनता की माँग , राजनीतिक फायदे और नुकसान इत्यादि । जिला बनने के बाद होने वाली परेशानियों से आजिज़ कई जिले के निवासी तो कहने लगते हैं की पुराना जिला ही अच्छा था , शायद इसीलिए सरकार ने प्रदेश इकाई पुनर्गठन आयोग की स्थापना की है , जो तहसीलों और जिलों की सीमाओं के बारे में शासन को अपने सुझाव देगा । मेरे अपने गृह जिले कटनी के गठन के पूर्व कई वर्षों तक चले आंदोलन में हमारी मित्र मण्डली की सक्रिय भागीदारी रहा करती थी और नौकरी में आने के बाद नए जिलों में पोस्टिंग के दौरान इसकी परेशानियों से भी मैं रूबरू हुआ । दरअसल नये जिले में सबसे ज़्यादा उम्मीद उसके नए कलेक्टर से होती है , जो ढेर सारी उम्मीदों के साथ , अत्यंत अल्प संसाधनों के बीच इस जिले को जनप्रतिनिधियों शासन और जनता की उम्मीदों के लिए संवार रहा होता है । पिछले दिनों इलाहाबाद से लौटते हुए , जब मैंने प्रदेश के नवीनतम जिले मैहर में रात्रि विश्राम का निश्चय किया तो नए जिले की परेशानियों से पहला सामना हुआ सर्किट हाउस ढूँढने में । मैहर के सर्किट हाउस के नाम पर गूगल पर सतना सर्किट हाउस दिखा रहा था और मज़े की बात ये कि पहुँचने पर देखा तो बोर्ड पर भी सर्किट हाउस सतना ही लिखा हुआ था । दूसरे दिन मैहर की पहली कलेक्टर श्रीमती रानी बाटड़ से मुलाक़ात हुई तो मैंने पाया वे आत्मविश्वास से भरपूर हैं और नये जिले के लिए बहुत कुछ करने का उनके मन में बहुत उत्साह है । मैहर में इन दिनों शारदा माता के दर्शनों के लिए भारी भीड़ उमड़ी हुई है , उसके मुश्किल इंतिजामों के साथ नये जिले में उनके द्वारा किए जा रहे कामों की चर्चा के बाद , मैंने उनसे इच्छा जाहिर की कि संभव हो तो मैं मैहर घराने के संस्थापक उस्ताद अलाउद्दीन ख़ान के घर स्थित संग्रहालय जाना चाहूँगा । रानी ने कहा कि ज़रूर जायें और यदि वहाँ जा रहे हैं , तो उनके घर की साज सँवार करवाने वाली अंबिका बेरी के आर्ट इचोल भी ज़रूर जाएँ ।
पद्म भूषण और पद्म विभूषण से अलंकृत उस्ताद अलाउद्दीन ख़ान भारतीय संगीत का बड़ा नाम रहे हैं उनके अनेक शिष्यों ने पूरी दुनिया में भारतीय संगीत का परचम लहराया है । मैहर बैंड की स्थापना करने वाले उस्ताद अलाउद्दीन ख़ान साहेब जिन्हें सब प्यार से बाबा कहा करते थे , अनेक प्रकार के वाद्य यंत्रों को कुशलता से बजाते थे , और कई रागों की उन्होंने खोज की थी । इसलिए उनके कई शिष्यों ने अलग अलग विधाओं में दुनिया को चमत्कृत किया है । सितार में रविशंकर और सरोद में अली अकबर साहब को भला कौन नहीं जानता । मैहर घराने की स्थापना करने वाले महान संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन ख़ान के घर को अम्बिका बेरी ने उनके पोते और मशहूर सरोदवादक आशीष ख़ान साहब की देखरेख में अब एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया है । मेरे लिए बाबा का नाम इसलिए महत्व रखता है क्योंकि बरसों पहले जब मेरे पिता मैहर में पोस्ट मास्टर थे तो बाबा जिंदा थे और उन्होंने न केवल बाबा के कार्यक्रमों को देखा था बल्कि उनसे मुलाक़ातों के किस्से भी वे हमें बचपन में सुनाया करते थे । संग्रहालय में अलाउद्दीन ख़ान साहब के वाद्य यंत्रों और उनकी संगीत से सजी यादों को सलीके से सजा कर रखा गया है और परिसर में ही उनके स्मारक भी हैं ।
कलेक्टर महोदया की सिफारिश पर हमारा अगला मुकाम था “आर्ट इचोल” जो अम्बिका बेरी ने स्थापित किया है । हमने सोचा तो था कि बस दस पंद्रह मिनट इसे देखते हुए जबलपुर के लिए निकल जाएँगे पर यहाँ आकर जो देखा सो पूरा पहर ही बीत गया । कलकत्ता से अम्बिका क़रीब बारह बरस पहले मैहर आईं थीं और ये जगह इन्हें इतनी पसंद आई कि इन्होंने यहाँ इचोल ग्राम के समीप लगभग दो ढाई एकड़ जमीन ख़रीद कर उस पर ये आर्ट सेंटर स्थापित किया है जो अद्भुत है । अम्बिका जी का उद्देश्य है कलाकारों को उनकी कला के लिए प्रश्रय , निखार और अवसर देना । उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति सम्मान से नवाज़ा जा चुका है और ख़ुद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी उनकी कला की प्रशंसा कर चुके हैं । बेतरतीब ,बिखरी चीजों से , जिन्हें हम वेस्ट मटेरियल कहते हैं , उन्होंने अद्भुत कलाकृतियाँ रची हैं । मेरा सौभाग्य था कि इन दिनों वे कलकत्ता से यहाँ आई हुई थीं तो मेरी उनसे मुलाक़ात भी हो पायी । आर्ट इचोल की कलाकृतियों की कुछ झलक मैं आपके लिए लाया हूँ बाक़ी आप अपने अगले दौरे में ख़ुद देखिए ।
नए जिले के टीथिंग ट्रबल और मैहर का संग्रहालय!