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नौकरी और जीवन में ये मन्त्र हमेशा मुझमें पैवस्त रहा आया । उज्जैन में मैं जब मुख्यालय एस.डी.एम. था , तब उज्जैन जनपद के अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आया , और मुझे रिटर्निंग अधिकारी बनाया गया । अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग के बाद जब मतगणना की बारी आई तो मैंने पाया , अविश्वास के पक्ष में दो मत ऐसे थे जिसमें निशान उल्टे लगे थे , पर स्पष्ट दिख रहा था कि वे अध्यक्ष को हटाने के लिए लगाए गए हैं । मेरे समक्ष इन मतों को संदिग्ध मतों की श्रेणी में पेश किया गया और उस पर मुझे निर्णय लेना था । मैं कुछ लिखित में आगे दूँ , उसी वक्त मेरे मोबाइल पर सत्ता पक्ष के एक विधायक जी का फ़ोन आया । मैंने फ़ोन उठाया तो उन्होंने कहा शर्मा जी सुना है आपके समक्ष कुछ डाउटफुल वोट्स फ़ैसले के लिए आए हैं । मैंने कहा जी सही कह रहे हैं । वे आगे बोले “ देख लेना अध्यक्ष हमारी पार्टी का ही है , और आपकी नौकरी अभी बड़ी लम्बी है , तो ऐसा फैसला करना जिससे आगे कोई परेशानी न हो । मैं इशारा समझ गया , मैंने ससम्मान उनको जवाब दिया “ सर मुझे पता है कि अभी नौकरी लम्बी है तो आप निश्चिंत रहें ऐसा कोई काम न करूँगा कि मेरी नौकरी पर कोई उँगली उठा सके । इसके बाद मैंने उन मतों को मान्य किए जाने का निर्णय दिया और अध्यक्ष को पद पर बने रहने के अयोग्य घोषित कर दिया ।





