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प्रजाति और वंशानुगत श्रेष्ठता

प्रजाति और वंशानुगत श्रेष्ठता

     – एन के त्रिपाठी

मैंने पुस्तकालय से 1922 में प्रकाशित एक पुस्तक प्राप्त की। पुस्तक की दशा थोड़ी दयनीय है और उसके पृष्ठ हल्के भूरे रंग के हो गए हैं। 80 वर्षों में इसे केवल दो या तीन बार ही प्रदाय किया गया था। गोरे लोगों की श्रेष्ठता के युग में प्रकाशित इस पुस्तक में विज्ञान और और सांख्यिकी का प्रयोग करके, तथाकथित असभ्य अन्य प्रजातियें को नीचा दिखाया गया है। केवल गोरी प्रजाति को ही महान बताया गया है।

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“द रिवोल्ट अगेंस्ट सिविलाइज़ेशन – द मेनेस ऑफ़ द अंडर-मैन” (सभ्यता के विरूद्ध विद्रोह – ‘अंडर-मैन’ की आपदा ) पुस्तक के लेखक लोथ्रोप स्टोडार्ड थे। वे एक अमेरिकी इतिहासकार, पत्रकार, राजनीति वैज्ञानिक और गोरी प्रजाति की श्रेष्ठता में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने अपना सिद्धांत सिद्ध करने के लिए चार्ल्स डार्विन के ‘प्राकृतिक चयन’ (natural selection) के सिद्धांत और 19वीं सदी के अंत के कुछ वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों के विचारों का उपयोग किया। वह मनुष्यों की समानता के विचार के पूर्णतया विरोधी थे। उनका कहना था, “सभ्यता श्रेष्ठ प्रजाति समूहों पर निर्भर करती है”। वह रूसो के ‘प्राकृतिक अवस्था’ (state of nature) के सिद्धांत और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के उनके सिद्धांत का उपहास उड़ाते थे। उनके लिए रूसो विक्षिप्त, मानसिक रूप से अस्थिर, नैतिक रूप से दुर्बल, यौन रूप से विकृत और विक्षिप्त थे!

लेखक ‘अंडर-मैन’ (निम्न-मानव) का एक विचार प्रस्तुत करते हैं। मैं उद्धृत करता हूँ: “अनुकूलन न कर पाने वाले, निम्न स्तर के मनुष्यों का एक बड़ा समूह बचा हुआ है, जो मूल रूप से असभ्य है और सभ्यता का कट्टर शत्रु है”। निम्न स्तरीय “अंडर-मैन’ की संख्या बढ़ रही है, जिससे सबसे गौरवशाली समाज भी जलकर राख और गंदगी के ढेर में परिवर्तित हो रहे हैं। ‘अंडर-मैन’ पर नियंत्रण होना चाहिए, परंतु उनकी संख्या बढ़ती जाती है, और अवसर मिलने पर वे विद्रोह के लिए एकत्र हो जाते हैं। अपने समय में, वह रूस की बोल्शेविक क्रांति से बहुत क्रोधित थे। उनके लिए, सर्वहारा वर्ग ( श्रमिक वर्ग) विद्रोही सेना थी जो अक्षम, ईर्ष्यालु, असंतुष्ट, सभ्यता और प्रगति से स्वाभाविक घृणा करने वाले तथा विद्रोह के लिए सतत तत्पर रहते थे। उनके लिए रूस स्वयं असभ्य देश था।

उनके लिए, गोरी प्रजाति सर्वश्रेष्ठ थी, और उसमें भी श्रेष्ठ वंश एवं परिवार वाले लोग ही वास्तव में सभ्य थे। उन्होंने भावना में बह कर गोरी प्रजाति के पक्ष में तर्क दिए हैं। विडंबना यह है कि उन्होंने घोषणा की, ” निस्संदेह आलोचना और विश्लेषण नपे-तुले और वैज्ञानिक होने चाहिए – न कि भावनाओं का विस्फोट”। हमें लेखक पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि उन्होंने यह उस समय लिखा था जब गोरी प्रजाति विश्व पर राज्य कर रही थी।