
सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय- महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी अधिकार, बोनस नहीं
पेंशनर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से 81 माह के बकाया महंगाई राहत के भुगतान की मांग की
भोपाल: पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 5 फरवरी 26 को दायर SLP में सर्वोच्च न्यायालय ने कर्मचारी संघ के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है। कोर्ट ने कहा है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है, यह कोई अतिरिक्त फायदा (बोनस) नहीं है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने कर्मचारियों एवं पेंशनरों को साल 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता चुकाए । कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य के कर्मचारी अपने पूरे बकाया महंगाई भत्ता पाने के हकदार हैं।
भुगतान से जुड़े वित्तीय बोझ और जटिलताओं को देखते हुए शीर्ष अदालत ने एक समिति का गठन किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा, हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गौतम भादुड़ी एवं भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया गया है।
भोपाल में इसी संदर्भ में पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी एवं प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को पश्चिम बंगाल के कर्मचारी एवं पेंशनरों की बहुत बड़ी जीत बताया है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से पेंशनरों के पिछले लगभग 81 माह के बकाया महंगाई राहत के शीघ्र भुगतान की मांग की है। सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय पूरे देश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों पर समान रूप से लागू होता है। सरकार को चाहिए कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 की आड़ में विगत 25 वर्षों से मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेंशनरों का किया जा रहा आर्थिक शोषण बंद कर पूर्व के सभी बकाया का शीघ्र भुगतान करें।





