
Supreme Court’s strong comment on Section 17A: भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की राह फिर खुलने के संकेत
New Delhi: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में वर्ष 2018 में जोड़ी गई विवादित धारा 17A को लेकर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता पर अलग अलग राय दी है। एक न्यायाधीश ने इसे कानून की मूल भावना के विरुद्ध बताया, जबकि दूसरे ने सीमित शर्तों के साथ इसे सही ठहराया। अब इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय बड़ी पीठ द्वारा लिया जाएगा।
● क्या है धारा 17A
-धारा 17A के तहत किसी लोकसेवक पर पद के दुरुपयोग से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने से पहले संबंधित सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी। इस प्रावधान के चलते ACB और CBI जैसी जांच एजेंसियां बिना अनुमति प्रारंभिक जांच तक नहीं कर पाती थीं।

● संशोधन से कैसे बनी भ्रष्टाचारियों की ढाल
-इस संशोधन के बाद देशभर में यह धारणा बनी कि बड़े पदों पर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों को एक कानूनी सुरक्षा कवच मिल गया है। जांच से पहले अनुमति की शर्त ने कई मामलों में कार्रवाई को वर्षों तक रोक दिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर होती चली गई।
● संसद में संशोधन और राजनीतिक चुप्पी
-यह संशोधन संसद में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया था। उस समय कांग्रेस सहित अधिकांश राजनीतिक दलों ने इसका खुलकर विरोध नहीं किया, जिससे यह प्रावधान बिना व्यापक बहस के कानून का हिस्सा बन गया।
● सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
-सुनवाई के दौरान एक न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि धारा 17A भ्रष्टाचार निरोधक कानून के उद्देश्य के विपरीत है और यह जांच एजेंसियों के हाथ बांध देती है। दूसरी ओर, दूसरे न्यायाधीश का मत था कि ईमानदार अधिकारियों को दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से बचाने के लिए कुछ सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन यह सुरक्षा पूर्ण अवरोध नहीं बननी चाहिए।
● अब आगे क्या होगा
-दोनों न्यायाधीशों की राय अलग होने के कारण मामला मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है। अब एक बड़ी पीठ यह तय करेगी कि धारा 17A पूरी तरह असंवैधानिक है या इसमें संशोधन कर इसे सीमित किया जाएगा।
● भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक मोड़
-यदि धारा 17A को असंवैधानिक ठहराया जाता है तो बीते सात वर्षों से बनी वह कानूनी दीवार टूट सकती है, जिसने कई बड़े भ्रष्टाचार मामलों की जांच रोकी हुई थी। यह फैसला देश में जवाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।





