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Chinese Manjha बना मौत की डोर:मकर संक्रांति पर कई जिंदगियां खत्म

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Chinese Manjha बना मौत की डोर:मकर संक्रांति पर कई जिंदगियां खत्म

Bangalore: मकर संक्रांति के आसपास पतंगबाजी का उत्साह जहां आसमान छूता है, वहीं चाइनीज मांझा हर साल कई परिवारों की खुशियां छीन लेता है। इस बार भी अलग अलग राज्यों से आई घटनाओं ने साबित कर दिया कि प्रतिबंध के बावजूद यह जानलेवा मांझा खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है और आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है।

 

● बीदर में आखिरी कॉल, खुशहाल सफर मौत में बदला

-कर्नाटक के बीदर जिले में तालमदगी ब्रिज के पास एक व्यक्ति बाइक से घर लौट रहा था। अचानक पतंग का चाइनीज मांझा उसके गले में फंस गया। बाइक की गति तेज होने के कारण धारदार डोर ने गला बुरी तरह चीर दिया। इस घटना की कुछ समय पहले ही उसने अपनी बेटी को फोन कर कहा बेटी मैं आ रहा हूं, लेकिन यही कॉल उसकी जिंदगी की आखिरी कॉल साबित हुई। कुछ ही देर में हादसा हो गया और उसकी मौत हो गई।

● एम्बुलेंस देरी पर परिजनों का आक्रोश

-इस हादसे के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। उनका कहना है कि यदि तत्काल चिकित्सा सहायता मिल जाती तो जान बच सकती थी। घटना के बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और सड़क पर उतरकर चाइनीज मांझे पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग करने लगे।

● संगारेड्डी में बाइक सवार की मौके पर मौत

-तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के फसलवाड़ी गांव में भी ऐसा ही दर्दनाक हादसा हुआ। बिहार निवासी 35 वर्षीय व्यक्ति बाइक चला रहा था, तभी चाइनीज मांझे की डोर उसके गले में लग गई। गहरी चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से चाइनीज मांझा जब्त कर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

● मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में भी कहर

-मध्यप्रदेश के इंदौर समेत कई शहरों में मकर संक्रांति के दौरान चाइनीज मांझे से गला कटने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में बाइक सवारों की मौत हुई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं। कई स्थानों पर राह चलते पैदल यात्रियों और बच्चों तक को मांझे ने घायल किया है।

● पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा

-चाइनीज मांझा केवल इंसानों ही नहीं बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भी घातक साबित हो रहा है। पतंग की धारदार डोर में फंसकर सैकड़ों पक्षी घायल हो चुके हैं और कई की मौत हो चुकी है। पशु प्रेमी संगठन हर साल इसे पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बताते हैं।

● प्रतिबंध के बावजूद बिक्री जारी, प्रशासन पर सवाल

-चाइनीज मांझा प्रतिबंधित होने के बावजूद कई शहरों और कस्बों में चोरी छिपे बिक रहा है। हर साल हादसों के बाद कार्रवाई की बात होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ सामान्य हो जाता है और फिर वही जानलेवा खेल शुरू हो जाता है।

मकर संक्रांति और अन्य त्योहारों पर लगातार हो रही इन मौतों ने यह साफ कर दिया है कि चाइनीज मांझा केवल एक डोर नहीं बल्कि मौत का हथियार बन चुका है। जब तक इसके निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर सख्ती से रोक नहीं लगेगी, तब तक हर साल ऐसी खबरें सामने आती रहेंगी।