
रतलाम के “रतन टाटा’ सुरेन्द्र पोरवाल को आज दी जाएगी श्रद्धांजलि, ईमानदारी, उद्योग सेवा की मिसाल रहें, बिना किसी समझौते के 51 साल से अधिक उद्योग संचालित!
Ratlam : औद्योगिक जगत के पितृपुरुष स्व. सुरेंद्र पोरवाल को रतलाम के औद्योगिक विकास का मजबूत स्तंभ माना जाता था। उन्होंने उद्योग को केवल व्यापार नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम माना।
अपने अनुज श्री वीरेंद्र पोरवाल के साथ वर्ष 1972 में पोरवाल इंडस्ट्रीज़ की स्थापना की। सीमित संसाधनों के समय में भी ईमानदारी और विश्वास के आधार पर उद्योग खड़ा किया। भारत में पाउडर मेटलर्जी उद्योग को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जो आयरन पाउडर विदेशों से आयात होता था, उसे भारत में निर्मित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया। स्वीडन एवं अन्य देशों से आने वाले मेटल पाउडर का भारतीय विकल्प तैयार किया। इससे सरकारी कंपनियों और उद्योगपतियों की लागत कम हुई और देश का विदेशी मुद्रा व्यय घटा। छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए सस्ते एवं गुणवत्तापूर्ण उपकरण तैयार किए। अनेक उद्योगपतियों को कम लागत में उद्योग स्थापित करने की प्रेरणा और तकनीकी सहयोग दिया। वह प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक नए उद्यमियों को निःस्वार्थ मार्गदर्शन देते थे। उनका कार्यालय केवल उद्योग का केंद्र नहीं, बल्कि सीखने और प्रेरणा का स्थान था। 51 वर्षों से अधिक समय तक बिना किसी समझौते के उद्योग संचालन किया। इंटेग्रिटी, एथिक्स और ट्रस्ट उनके जीवन और व्यवसाय की मूल पहचान थी।
रोजगार और औद्योगिक विकास में योगदान!
उनके मार्गदर्शन से प्रदेश और देश में अनेक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए। हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। वे केवल उद्योगपति नहीं, बल्कि समाजसेवी दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति थे। उद्योग को समाज के उत्थान और युवाओं को अवसर देने का माध्यम मानते थे।:संभागीय उद्योग संघ रतलाम के पूर्व अध्यक्ष रहें। पाउडर मेटलर्जी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संस्थापक मार्गदर्शकों में शामिल रहे।उन्होंने अपने परिवार को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और ईमानदारी की विरासत दी। आज भी पोरवाल परिवार उन्हीं मूल्यों पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बहुत पहले समझ लिया था कि भारत को आत्मनिर्भर औद्योगिक तकनीक की आवश्यकता है। इसी सोच के कारण उन्होंने विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में कार्य किया। बड़ी उपलब्धियों के बावजूद अत्यंत सरल और सहज स्वभाव रखते थे। हर व्यक्ति से आत्मीयता से मिलना उनकी विशेष पहचान थी। वे युवाओं को नौकरी खोजने से पहले रोजगार देने वाला बनने की प्रेरणा देते थे। उनका विश्वास था कि उद्योग विकास ही राष्ट्र विकास का आधार है। उनकी सबसे बड़ी विरासतउद्योग नहीं विश्वास।संपत्ति नहीं संस्कार। सफलता नहीं प्रेरणा।
प्रभावशाली पंक्तियां!
उन्होंने फैक्ट्री नहीं बनाई उन्होंने भविष्य गढ़ा, वे उद्योगपति कम उद्योगों के मार्गदर्शक अधिक थे, उनका जीवन यह सिखाता है कि ईमानदारी से भी उद्योग खड़े किए जा सकते हैं। स्व. सुरेंद्र पोरवाल ने उद्योग को व्यापार नहीं राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया। आपने अपने अनुभव से उद्योगों की लागत को कम किया जिससे कि सामान्य व्यक्ति भी उद्योग स्थापित करने की हिम्मत कर सकें। आपके द्वारा जो मशीने निर्मित की जाती वह चीन से भी सस्ती और अच्छी गुणवता की रहती। जिससे उद्योगपतियों को कम से कम लागत में उद्योग स्थापित करने में सहयोग मिलता आप द्वारा किसी भी उद्योग को स्थापित करने में संपूर्ण मार्गदर्शन दिया जाता जिससे कि उद्योगपतियो को आत्मबल प्रदान होता। रतलाम एवं प्रदेश के उद्योग विकास की जो विकासशील गाथा आप द्वारा लिखी गई है वह सदैव याद करी जाएगी एवं सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। आपका चले जाना रतलाम ही नहीं परंतु प्रदेश एवं देश के लिए भी दुख का विषय है l
एक बार पुनः आपको आत्मीय श्रद्धांजलि!
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आज बुधवार 10 जून सुबह 10 बजे सजनप्रभा अजंता टॉकीज रोड पर किया गया हैं!




