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स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी भारतीय संत परंपरा के शिखर महापुरुष थे : कैलाश व्यास

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स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी भारतीय संत परंपरा के शिखर महापुरुष थे : कैलाश व्यास

Ratlam : शहर के राजेन्द्र नगर स्थित शिशु विहार में समन्वय परिवार के तत्वावधान में गुरुवार को पद्मभूषण, महामंडलेश्वर एवं भारत माता मंदिर के संस्थापक पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंदगिरीजी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ समाजसेवी एवं अभिभाषक कैलाश व्यास तथा पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। प्रारंभ में समन्वय परिवार के माधव काकानी ने प्रार्थना पाठ कराया। मुख्य वक्ता कैलाश व्यास ने अपने उदबोधन में कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंदगिरीजी महाराज भारतीय संत परंपरा के शिखर महापुरुष थे। उन्होंने संतत्व, सदाचार और सद्प्रेरणा को अपने मन, वचन और कर्म से साकार रूप प्रदान किया। बाल्यकाल से ही उनकी विलक्षण प्रतिभा एवं आध्यात्मिक चेतना के दर्शन उनके परिजन को होने लगा था। किशोरावस्था में उन्होंने मां गंगा के समक्ष यह संकल्प लिया था कि वे अपने लिए कभी कुछ नहीं मांगेंगे, चाहे प्राण ही क्यों न चले जाएं। उन्होंने इस संकल्प का आजीवन पालन किया।

 

गुरुभक्ति का एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए व्यास ने बताया कि एक बार उनके गुरुदेव स्वामी वेदव्यासानंदजी उन्हें नदी तट पर गीता का पाठ करा रहें थे। अचानक गुरुदेव ने पूछा, “सत्यमित्र क्या तुम सामने बह रही नदी में कूद सकते हो?” उन्होंने बिना किसी संकोच के ‘हां’ कह दिया। गुरुदेव की आज्ञा मिलते ही वे नदी में कूद पड़े, जबकि उन्हें तैरना नहीं आता था। जब वे डूबने लगे तो गुरुदेव ने स्वयं नदी में उतरकर उन्हें बाहर निकाला और पूछा, जब तुम्हें तैरना नहीं आता था, तब तुम नदी में क्यों कूदे? इस पर स्वामी सत्यमित्रानंदजी ने उत्तर दिया, “गुरु का आदेश ही ईश्वर का आदेश होता है। गुरु के सानिध्य में कभी अमंगल नहीं हो सकता। व्यास ने बताया कि वर्ष 2004 के उज्जैन सिंहस्थ महापर्व में स्वामीजी ने संकल्प लिया था कि वे नगर के समस्त सफाईकर्मियों के साथ क्षिप्रा स्नान करेंगे। उस समय वे गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और तेज बुखार से पीड़ित थे। चिकित्सकों द्वारा मना किए जाने के बावजूद उन्होंने कहा कि ये सभी सफाईकर्मी हमारे भाई-बहन हैं और उनके साथ स्नान करना मेरा कर्तव्य है। इस प्रकार स्वामीजी ने समन्वय, समता और सद्विचारों की त्रिवेणी को देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में अत्यंत प्रामाणिकता के साथ प्रवाहित किया।qq

इस अवसर पर पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा ने स्वामीजी के अपने परिवार में आगमन तथा उनकी कृपा और आशीर्वाद से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम में जावद के गुरुभक्त स्वर्गीय भगवानदास मुछाल को भी 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा में समन्वय परिवार के अध्यक्ष अशोक आप्टे शिवराम शर्मा, जितेन्द्र सिंह वाघेला, लल्लनसिंह ठाकुर, सुनील लाठी, मुकेश शुक्ला, दयाराम भाई, हेमन्त चोरमा, कैलाश छाबड़ा, श्याम पंडित, प्रशांत व्यास सहित अनेक श्रद्धालुगण एवं भक्तजन उपस्थित थे, संचालन माधव काकानी ने किया!

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