
मुख्यमंत्री ने मंदसौर जिले की 2.60 लाख लाड़ली बहनों को 39.05 करोड़ की राशि अंतरित की
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर / मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में बुधवार को ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना अंतर्गत माह मई 2026 की मासिक आर्थिक सहायता राशि का अंतरण किया।
इस अवसर पर मंदसौर जिला स्तरीय कार्यक्रम कलेक्टर सभागृह में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा गया तथा उनके उद्बोधन को उपस्थित महिलाओं एवं सुधीजनों ने सुना।

जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री बी.एल. विश्नोई ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने जिले की कुल 2 लाख 60 हजार 396 लाड़ली बहनों को 39.05 करोड़ रुपये की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।
उन्होंने बताया कि यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में उपस्थित लाड़ली बहनों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से उन्हें हर माह आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह
योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है।
करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है।
योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।





