
कार्यभारित और आकस्मिता से वेतन पाने वालों को दे दिए त्रुटिपूर्ण उच्च वेतनमान, अब होगी जांच
भोपाल: मध्यप्रदेश में कई विभागों ने कार्यभारित और आकस्मिता से वेतन पाने वाले शासकीय सेवकों को विभागीय सेवा भर्ती नियमों के प्रावधानों के विपरीत जाकर त्रुटिपूर्ण उच्च्तर वेतनमान स्वीकृत कर दिए गए। ऐसे अनेक प्रकरणों प समय पर संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा से वेतनमान का अनुमोदन, सत्यापन भी नहीं काया गया। अब ऐसे सभी मामलों की जांच के लिए पूरे मध्यप्रदेश में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
विधिक जटिलताओं एवं अपीलों में अत्यधिक विलंब के कारण न्यायालयों ने कर्मचारियों के पक्ष में आदेश जारी किए है। वित्त विभाग ने लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जलसंसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को निर्देशित किया है कि प्रशासनिक एवं वित्तीय विसंगतियों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए वित्त विभग ने पूर्व में वसूली राशि के संबंध में तथा ब्याज राशि के संबंध में निर्देश जारी किए है जिनका कड़ाई से पालन किया जाए।
समस्त संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी और विभागाध्यक्ष यह सुनिश्चित करें कि सेवा नियमों के अनुरुप ही वेतनमान स्वीकृत किया जाए। किसी भी संदेहास्पद या विशेष परिस्थति में संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा से अनिवार्य रुप से पूर्व अनुमोदन प्राप्त किया जाए। सभी विभाग आगामी दह माह की अवधि में सेवानिवृत्त होंने वाले सभी शासकीय सेवकों के सेवा अभिलेखों और वेतन निर्धारण की सूक्ष्म जांच के लिए एक विशेष अभियान चलाए।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत रिटायरमेंट से पूर्व ही संबंधित सरकारी कर्मचारी के संपूर्ण सेवा काल के वेतन निर्धारण को अनुमोदन, सत्यापन संबंधित संभागीय संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा से प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना सुनिश्चित करे ताकि सेवानिवृत्ति के समय या पश्चात किसी भी प्रकार की विसंगति या वसूली की स्थिति निर्मित न हो।
विशेष अभियान को अनिवार्य रुप से आगामी तीन माह में पूर्ण कर विभागाध्यक्ष के माध्यम से संकलित प्रतिवेदन आयुक्त कोष एवं लेखा को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए है। निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी कार्यालय प्रमुख व्यक्तिगत रुप से उत्तरदायी होंगे।





