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चार शुभ संयोग में मनाया जाएगा श्रावण मास का प्रथम सोमवार

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पंडित ज्योतिर्विद राघवेंद्ररविश राय गौड़ मंदसौर
(प्रस्तुति डॉ घनश्याम बटवाल मंदसौर)

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मंदसौर.   श्रावण मास धर्म-अध्यात्म के साथ सौभाग्य का सूचक माना जाता है। शिव आराधना से मनोरथ पूर्ण होते हैं, अनुष्ठान, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव पुराण का विशेष महत्व है।

देश के ज्योतिलिंगों के साथ शिवालयों में नित्य धार्मिक गतिविधियों को सम्पन्न किया जा रहा है।

मंदसौर के अद्वितीय अष्टमूर्ति पशुपतिनाथ महादेव, सहस्त्र शिवलिंग महादेव में श्रावण मास सामुहिक मनोकामना अभिषेक जारी है जो मासांत तक चलेगा।

श्रावण में शिव भक्तों के लिए सोमवार का विशेष महत्व रहा है। इस बार चार शुभ संयोग बन रहे हैं।

सावन महीने का पहला सोमवार 18 जुलाई को है। इस दिन शोभन, प्रीति व सर्वार्थ सिद्धि योग में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया जाएगा।

साथ ही साथ ज्योतिष गणना के अनुसार सावन के पहले सोमवार पर चंद्रमा और गुरू की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। गजकेसरी योग ज्योतिष में बहुत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ये योग भगवान शिव का पूजन करने या कोई भी शुभ कार्य करने के लिए बहुत ही उत्तम है।

शिवपुराण अनुसार श्रावण का महत्व

शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता के अध्याय 16 में शिव जी कहते हैं कि मासों में श्रावण (सावन) मुझे बहुत प्रिय है। इस महीने में श्रवण नक्षत्र वाली पूर्णिमा रहती है। इस वजह से भी माह को श्रावण कहते हैं। सावन महीने में सूर्य अधिकतर समय कर्क राशि में रहता है। जब सूर्य कर्क राशि में होता है, उस समय में की गई शिव पूजा जल्दी सफल होती है।

शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा द्रव्य भगवानको चढ़ाने से क्या फल मिलता है

भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।

तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।

गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।
यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करना चाहिए।

ज्वर बुखार होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है।

सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सावन सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।

सुगंधित तेल इत्र से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।

शिवलिंग पर ईख, गन्ना का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।

शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।

अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।

शमी पत्रों पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।

बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।

जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।

हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-संपत्ति में वृद्धि होती है।

धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं। जो कुल का नाम रोशन करता है।
दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

शिवलिंग पर ठंडे जल की धारा से अभिषेक

शिवजी पर ठंडे जल की धारा की परंपरा के पीछे समुद्र मंथन की कथा है। जब देवताओं और दानवों ने समुद्र को मथा तो सबसे पहले हलाहल विष निकला, जिसे शिव जी ने पी लिया था। इस विष को भगवान ने गले में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया। विष की वजह शिव जी के शरीर में गर्मी बहुत बढ़ गई थी। इस गर्मी को शांत करने के लिए शिवलिंग पर ठंडे जल की धारा चढ़ाने की परंपरा है।

भगवान शंकर की पूजा मूर्तिमान विग्रह एवं शिवलिंग दोनों अत्यंत फलदाई है। इसलिए सावन में विशेष तरीको से पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव का आर्शिवाद मिलेगा और मनोकामना पूरी होगी। शिवलिंग, नर्मदेश्वर, पारदेश्वर, इस्फकेश्वर, पार्थिवेश्वर किसी भी शिवलिंग की पूजा श्रावण में अत्यंत फलदाई है।

सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः।
*भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥*