यहाँ युद्ध विराम नहीं, रणभूमि में जवाब देने की तैयारी है…

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यहाँ युद्ध विराम नहीं, रणभूमि में जवाब देने की तैयारी है…k

कौशल किशोर चतुर्वेदी

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के दिन पूरे हो गए हैं। ऐसा लग रहा है कि जल्द ही एक बार फिर यह दोनों देश रणभूमि में आमने-सामने दिखाई देंगे। अमेरिका के लिए इससे बुरा दिन क्या हो सकता है कि जब ईरान जैसा देश अमेरिका के साथ बातचीत को कोई तवज्जो नहीं दे रहा है। अब भी अमेरिका दादागिरी के जरिए दिल जीतने का नाटक कर रहा है। जबकि यह उसको भी मालूम है कि उसकी दादागिरी का असर ईरान पर होने वाला नहीं है। वास्तव में अमेरिका और ईरान दोनों के मन में ही युद्धविराम दूर-दूर तक नहीं है बल्कि रणभूमि में एक-दूसरे को करारा जवाब देने की तैयारी ही दोनों तरफ नजर आ रही है।

ईरान कह रहा है कि उसने अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने का कोई फ़ैसला नहीं किया है। वहीं अमेरिका ने कहा है कि वह इस बातचीत में शामिल होगा। यह दृश्य कितना हास्यास्पद नजर आ रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम की शुरुआत से ही उसका उल्लंघन किया। इस्माइल बक़ाई ने चेतावनी दी कि ईरान कोई समयसीमा या अल्टीमेटम स्वीकार नहीं करेगा और अगर अमेरिका या इसराइल कोई क़दम उठाते हैं तो ईरान ताक़तवर जवाब देगा। वहीं ईरानी संसद के अध्यक्ष और ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता है, तो होर्मुज़ स्ट्रेट में यातायात सीमित रहेगा।

ग़ालिबाफ़ ने एक बार फिर लेबनान में युद्धविराम को ईरान-अमेरिका समझौते से जोड़ा और कहा कि ‘प्रतिरोध मोर्चा’ युद्ध में ईरान की सहायता के लिए आया था और इसलिए युद्धविराम में उन्हें निश्चित रूप से शामिल किया जाना चाहिए था। लेबनान में हिज़्बुल्लाह, यमन में हूती विद्रोही और ग़ज़ा में हमास को ‘प्रतिरोध की धुरी’ कहा जाता है जो ईरान के समर्थक रहे हैं।

यह कहानी ही ऐसी है जिसका समाधान बहुत सरल तरीके से होना संभव नहीं है। विरोधाभासों की भरमार है, पारस्परिक विश्वास कहीं नजर नहीं आ रहा है और एक दूसरे के प्रति घृणा का बाजार पूरे शबाब पर है। ऐसे में युद्धविराम की कल्पना भी बेमानी है।

 

इसीलिए ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है और होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से बंद हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान कि “ईरान अमेरिका की सभी मांगों पर सहमत होगा” पर ईरान में कई प्रतिक्रियाएं आईं और बातचीत को लेकर और अमेरिका की मांगों के आगे झुकने या न झुकने को लेकर ईरान के विभिन्न गुटों के बीच मतभेद उजागर हुए हैं।

ग़ालिबाफ़ ने ईरानी टेलीविज़न को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब दुश्मन अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाता, तो इसका मतलब है कि वह असफल हो गया है। जब ट्रम्प बार-बार ईरान को बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं तब

ग़ालिबाफ ने अमेरिका और इसराइल की सैन्य श्रेष्ठता को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि ईरान ने उनका मुक़ाबला अपने ही तरीके़ से किया। साथ ही यह भी कहा कि हमने एक आड़ा-टेढ़ा युद्ध लड़ा और अपनी योजना और तैयारी के बल पर दुश्मन को खदेड़ दिया। और विश्वास व्यक्त किया कि “हम यह जंग जीत रहे हैं।” वहीं अमेरिका ने ईरान के एक कॉमर्शियल शिप टॉस्का को सीज कर लिया. इस्लामाबाद में वार्ता के दूसरे दौर की टेबल सजी है और ईरान बदले की कस्में खा रहा है. अब तो इसमें चीन की भी एंट्री हो गई है।

खैर, यह सभी घटनाक्रम यही बता रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत भी होगी, तब भी शांति की जगह युद्ध की थाली ही सजेगी। इसकी मुख्य वजह भरोसे की कमी और अमेरिकी दादागिरी ही रहेगी। और आगे जो भी होगा वह पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी ही साबित होगा…।

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।